अनलाॅक 5.0  के दौरान रेलवे टिकटों की बढी मांग को लेकर अपराधी उठा रहे फायदा, आठ प्रतिबंधित सॉफ्टवेयर बना रेलवे की वेबसाइट में लगा रहे हैं सेंध

अनलाॅक 5.0  के दौरान रेलवे टिकटों की बढी मांग को लेकर अपराधी उठा रहे फायदा, आठ प्रतिबंधित सॉफ्टवेयर बना रेलवे की वेबसाइट में लगा रहे हैं सेंध। 

 

लखनऊ: उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में जैसे-जैसे शहर अनलॉक 5 की ओर बढ़ रहा है वैसे-वैसे ट्रेनों की टिकटों की मांग भी बढ़ती जा रही है। बढ़ रही इन टिकटों की मांग को लेकर कई अपराधी इसका फायदा उठा रहे हैं। मिली जानकारी के अनुसार भारतीय रेलवे खानपान एवं पर्यटन निगम की वेबसाइट में जालसाजों द्वारा आठ प्रतिबंधित सॉफ्टवेयर बना सेंध लगाया जा रहा है।

 एक नजर उन प्रतिबंधित सॉफ्टवेयरओं पर

 

रेडमिर्ची के खत्म होने के बाद बनाकर सक्रिय किया गया रेड मैंगो व वोल्टी सॉफ्टवेयर।

42, तत्काल प्लस, तत्काल प्रो, रियल मैंगो, तत्काल सुपरफास्ट तथा ब्लैक हिट भी शामिल है इन प्रतिबंधित सॉफ्टवेयरओं की सूची में जो लगा रहे हैं रेलवे की वेबसाइट में सेंध।

 

 

अब तक कई अपराधियों की कर ली गई है पहचान पर गिरफ्त से अभी भी है दुर

 

मिली जानकारी के अनुसार इस तरह के मामलों के आंकड़ों पर अगर एक नजर डालें तो बीते 1 महीने में इन प्रतिबंधित सॉफ्टवेयर के इस्तेमाल होने के 42 मामले दर्ज किए गए हैं जिनमें से अधिकतर लखनऊ शहर में सक्रिय पाए गए हैं। आपको बता दें इससे पूर्व इन प्रतिबंधित सॉफ्टवेयरओं का पूर्वांचल के कई जिलों में इस्तेमाल किया जा रहा था। बात अगर पहले के मामलों की करें तो ऐसे सॉफ्टवेयर मुंबई और अहमदाबाद से ₹25000 में खरीदे जाते थे।  इन मामलों के विषय में रेलवे विभाग को जानकारी तब मिली जब इन सॉफ्टवेयर को बेचने वाले सुपर सेलर को गिरफ्तार किया गया।  इनकी गिरफ्तारी के बाद कोलकाता से सॉफ्टवेयर बेचने वाले सुपर सेलर के साथ-साथ अन्य सात एजेंट सहित लगभग 18 दलालों के  विषय में अधिकारियों को पता चला है गौरतलब है कि अभी यह अपराधी पुलिस के गिरफ्त से फरार है।

 

यहां पर यह बात भी गौर करने वाली एवं चिंताजनक है  की आए दिनों इन सॉफ्टवेयरओं का अवैध रूप से  इस्तेमाल व इन्हें बेचने का चलन लखनऊ शहर में  काफी प्रचलित हो रहा है।

 

सुपर सेलर के पकड़े जाने के बाद  लखनऊ में सक्रिय हुआ यूट्यूब के माध्यम से जालसाजी का धंधा

 

प्रतिबंधित सॉफ्टवेयर के सुपर सेलरो के पकड़े जाने को लेकर अभी प्रशासन चिंता मुक्त हुआ नहीं था कि आरपीएफ को मिली जानकारी के अनुसार लखनऊ में इन दिनों यूट्यूब पर एक गिरोह काफी तेजी से सक्रिय हो रहा है। इस  विषय में आरपीएफ द्वारा साझा की गई जानकारी के अनुसार यूट्यूब पर सक्रिय ऐसे गिरोह प्रतिबंधित सॉफ्टवेयर को मोबाइल वह लैपटॉप पर इंस्टॉल करते हैं। जिसके बाद व्हाट्सएप की मदद से संपर्क कर लेनदेन की प्रक्रिया ऑनलाइन ही पूरी करते हैं। आपको बता दें ऐसे प्रतिबंधित सॉफ्टवेयर के इस्तेमाल से आईआरसीटीसी की वेबसाइट के एप्लीकेशन को खोलकर यात्री बैंक का विवरण पहले ही भर देते हैं और इस्तेमाल होने वाला कैप्चा भी बाईपास हो जाता है।

 

आरपीएफ के एक वरिष्ठ अधिकारी द्वारा साझा की गई जानकारी के अनुसार इस नए प्रतिबंधित सॉफ्टवेयर की मुख्य कड़ी लखनऊ में ही पाई गई है। हालांकि अभी आईआरसीटीसी के कई पर्सनल आईडी पर  अधिकारियों द्वारा नजर रखी जा रही है ताकि सक्रिय हुए इस नए गिरोह के विषय में जल्द से जल्द जानकारी हासिल की जा सके और प्रचलन में आए इन प्रतिबंधित सॉफ्टवेयरओं के इस्तेमाल पर एक बार फिर अंकुश लगाया जा सके।

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