आरटीओ विभाग में है अधिकारियों की कमी , इसलिए दौड़ रहीं हैं रोड पर बिना नंबर की गाड़ियां।

आरटीओ विभाग में है अधिकारियों की कमी , इसलिए दौड़ रहीं हैं रोड पर बिना नंबर की गाड़ियां।

 

लखनऊ, ( कुलसूम फात्मा )  आरटीओ विभाग में अधिकारियों की कमी होने के कारण रोड पर बिना नंबर की गाड़ियां आवागमन कर रही हैं। ट्रांसपोर्ट नगर आरटीओ कार्यालय के काउंटर की हालत यह है कि वहां पर फाइलों का ढेर लगा हुआ है और फाइलों के कार्य नहीं हो रहे है , जिसके चलते रोड पर आंकड़ों के मुताबिक यहाँ पर 17 हजार दो पहिया वाहन तथा चार पहिया नए वाहन सड़क पर दौड़ रहे हैं। वह भी बिना नंबर के नई गाड़ियां नवरात्रि के समय खरीदने के पश्चात इन नई गाड़ियों की फाइलें आरटीओ में पहुंचा दी गई शोरूम से।
परंतु अभी तक वहां से इन गाड़ियों को नंबर ना मिल सके
आरटीओ ऑफिस में यहां पर सारा काम आरआई के ऊपर है। जिसके कारण इन फाइलों पर सिग्नेचर नहीं हो पा रहे हैं।

फाइलों का ढेर लगा हुआ है और फाइलों के कार्य नहीं हो रहे है , रोड पर 17 हजार वाहन सड़क पर दौड़ रहे हैं बिना नंबर के

वाहन स्वामियों का कहना है कि हम लोगों का रजिस्ट्रेशन प्रमाण पत्र पाने के लिए शोरूम के चक्कर काट रहे हैं। और राजेश श्रीवास्तव कहते हैं की लाखों रुपए लगाकर गाड़ी खरीदी परंतु गाड़ी का नंबर अब आरटीओ ऑफिस के द्वारा नहीं प्राप्त हो पा रहा है। 10 दिन बीत गए अभी नंबर नहीं मिला। पहले गाड़ी खरीदो उसके बाद चालान का विभाग की लापरवाही के कारण पैसे भरो। यह भी भुगतान अब हम ही को करना पड़ रहा है

कहते हैं  – नहीं तो गाड़ी खरीद कर घर में ही हम रख लें उसके बाद जब नंबर मिले तो हम गाड़ी चलाना प्रारंभ करें इन सब बातों का जिम्मेदार कौन होगा ? वह कहते हैं गाड़ी बिना नंबर हम लोग चला रहे हैं और चालान होने या बिना नंबर गाड़ी से घटना घटित यदि होती है तो जिम्मेदार भी हमें लोग ठहराए जाएंगे, जबकि हमें नंबर चाहिए हैं और हम दौड़ भी रहे हैं। उसके पश्चात भी हमें नंबर प्राप्त नहीं हो रहे हैं। ऐसे में विभागीय लापरवाही कहीं हमे महंगी ना पड़ जाए।

आरटीओ प्रशासन रामफेर द्विवेदी का कहना है कि  – दोनों अधिकारी अभी काम की व्यवस्थाओं को समझ रहे हैं। वह नए हैं और धीरे-धीरे इसे सीख जाएंगे और सभी लंबित कार्य जल्द से जल्द निपटाना प्रारंभ कर देंगे।

द्विवेदी जी कहते हैं कि आरटीओ ऑफिस में काम इतना है कि दो आरटीओ अधिकारियों का होना तथा ना होना एक जैसा है। ऐसे में डीएल और वाहन संबंधित सभी कार्य अस्त व्यस्त हो गए हैं
कहते हैं कि आवेदकों की इतनी अधिक संख्या है कि कर्मियों और अधिकारियों को संभालने में छींके आ जाती हैं। कार्य को जल्द और सुव्यवस्थित ढंग से करने का प्रयास दिन पर दिन किया जा रहा है। इसे हम जल्द से जल्द निपटा देंगे।

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