उजाला योजना के तहत बांटे गए एलईडी बल्ब की मदद से पीक आवर्स में 681 मेगा वाट बिजली की मांग में आई गिरावट

उत्तर प्रदेश के ऊर्जा मंत्री श्रीकांत शर्मा ने ट्वीट कर जानकारी साझा करते हुए कहा की उजाला योजना के तहत राज्य में जो दो करोड़ 62 लाख 10 हजार एलईडी बल्ब बांटे गए। इसकी मदद से सालाना 3403 यूनिट बिजली की बचत हो रही है। इतना ही नहीं अगर पर्यावरण के नजरिए से देखें तो हर साल करीब 27 लाख 55 हजार टन कार्बन डाइऑक्साइड का उत्सर्जन में भी कमी देखने को मिला है।

इन आंकड़ों को ट्विटर पर साझा करने का मंत्री श्रीकांत शर्मा का एकमात्र उद्देश्य लोगों द्वारा अपने घरों में एलईडी बल्ब व ट्यूबलाइट के प्रयोग पर जोर देने का था। उन्होंने कहा कि अगर राज्य के हर एक घरों में एलईडी बल्ब, एलईडी टेलीविजन, एलईडी ट्यूबलाइट और एलईडी पंखा का लोगों द्वारा उपयोग किया जाने लगा तो जो सरकार का 24 घंटे बिजली देने का लक्ष्य है उसे जल्द से जल्द हासिल किया जा सकेगा।

इन सबके अलावा एलईडी बल्ब के इस्तेमाल की विशेषता बताते हुए उन्होंने कहा की इन बल्बों की मदद से  वैसे समय में जब बिजली की मांग सबसे अधिक होती है में 681 मेगावाट बिजली की मांग में भी गिरावट देखने को मिली है।  बिजली की खपत कम होने की वजह से सालाना 362 करोड रुपए की बचत भी हो रही है। 

वहीं अगर इन सारे आंकड़ों को देश के नजरिए से देखें तो राज्य  में कार्बन डाइऑक्साइड के उत्सर्जन में आई गिरावट की वजह से पूरे देश में लगभग 3.85 करोड़  टर्न कार्बन उत्सर्जन में भी कमी देखने को मिली है। अगर पर्यावरण के लिहाजे से देखें तो एलईडी बल्ब का उपयोग ना केवल बिजली बचाने में सहायता कर रहा है अपितु पर्यावरण के लिए हानिकारक कार्बन डाइऑक्साइड गैस की मात्रा को भी घटाने में काफी सहयोग कर रहा है।

 राज्य में वितरित किए गए एलईडी बल्ब व अन्य आंकड़ों के अलावा प्रदेश के ऊर्जा मंत्री ने राष्ट्र के आंकड़े भी ट्विटर के माध्यम से लोगों के साथ साझा किया।  जानकारी साझा करने के दौरान उन्होंने कहा  की उजाला योजना के अंतर्गत पूरे देश में करीब 36 करोड़ 64 लाख एलईडी बल्ब बांटा गया है। जिसकी वजह से राष्ट्र स्तर पर हर साल करीब 3 करोड़ 85 लाख टन कार्बन डाइऑक्साइड का उत्सर्जन में कमी देखने को मिली है।

वहीं इसके अलावा 43590 मिलियन यूनिट बिजली की बचत भी हो रही है।  वहीं अगर  राष्ट्र के आर्थिक पहलू से देखें तो इन बल्बों की मदद से सालाना करीब 19036 करोड़ रुपए की बचत हो रही है।  वही बात उन वक्तों की करें जब बिजली की मांग सबसे अधिक होती है तो एलईडी बल्ब के  इस्तेमाल होने की वजह से करीब 9528 मेगा वाट बिजली की मांग में गिरावट देखने को मिली है।

आपको बता दें एलईडी बल्ब का पूरे देश में वितरण उजाला योजना के तहत किया जा रहा है। जिसका एकमात्र उद्देश्य बिजली की खपत में बचत कर गरीबों के घर में होने वाले अंधेरों को दूर करना है। इसके अलावा बिजली से जो नुकसान पर्यावरण को होता है उससे पर्यावरण की रक्षा करना इन बल्बों के  इस्तेमाल हेतु उद्देश्य में शामिल है। इन सबके अलावा बिजली के उपयोग में आई कटौती के वजह से लोगों के साथ साथ सरकार को भी काफी हद तक उनके आर्थिक पहलुओं में मदद मिल रही है, क्योंकि एलईडी बल्ब, ट्यूबलाइट, एलईडी पंखे या एलईडी टीवी की मदद से आर्थिक खपत भी काफी कम हो गई है।

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