कोरोनावायरस के खिलाफ लड़ाई लड़ने वाले हमारे सरकारी डॉक्टर के लिए या एक बहुत बड़ी गंभीर समस्या है

लखनऊ पूरे उत्तर प्रदेश में जहां कोरोना वायरस के खिलाफ लड़ाई लड़ने वाले हमारे सरकारी डॉक्टर के लिए या एक बहुत बड़ी गंभीर समस्या है। 

सबसे पहले उन्होंने  अपने आठ सहयोगीओं को वायरस बीमारी से खो दिया है तो सारी डॉक्टर उत्तर प्रदेश के परेशान हैं लगातार कोरोना वायरस संक्रमित मरीजों की संख्या में बढ़ोतरी होते हुए देखा जा सकता है इस कारण से सारे सरकारी डॉक्टर परेशान हैं। 

 

सरकारी डॉक्टरों का कहना है कि यहां पर देश में कोरोना वायरस के संक्रमित मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है वहीं डॉक्टरों की संख्या में कमी भी आ रही है क्योंकि जिस हिसाब से प्रदेश में कोरोना वायरस के प्रकोप से महामारी फैली हुई है उस हिसाब से हमारे पास डॉक्टर की कमी है और बेड तथा और भी गंभीर जरूरत के सामान की भी कमी है लगातार उत्तर प्रदेश में डॉक्टरों की संख्या धीरे-धीरे कम हो रही है।

लेकिन डॉ  उनके काम का दबाव अपने आप में बढ़ता जा रहा है।

 

डॉक्टरों का कहना है कि उनकी संख्या लगातार  कम होती दिख रही है हमारी  बातचीत के दौरान कुछ डॉक्टरों ने अपना डाटा शेयर किया उससे डाटा में उन्होंने बताया ढाई सौ से 300 डॉक्टर रिटायर होते हैं उत्तर प्रदेश में हर साल यह डॉक्टर रिटायर होकर चले जाते हैं। 

डॉ अमित सिंह सरकारी डॉक्टर के संस्था प्रांतीय चिकित्सा स्वास्थ्य सेवा संघ पीएच पीएमएचएस के अपर सचिव हैं। 

उन्होंने कहा कि भारतीय सार्वजनिक स्वास्थ्य मानक के अनुसार 33000 स्पेशलिस्ट और 14000 एमबीबीएस डॉक्टरों की उत्तर प्रदेश स्वास्थ्य विभाग को जरूरत है। उत्तर प्रदेश में केवल 3000 स्पेशलिस्ट और 8000 एमबीबीएस डॉक्टर ही अस्थाई पदों पर काबिज हैं। 

उत्तर प्रदेश में 18382 डॉक्टरों की स्वीकृति संख्या है उत्तर प्रदेश की आबादी लगभग 23 करोड 230 मिलियन है और बेड की ताकत की कैपेसिटी मात्र कुछ  हजार है फरवरी 2020 में गन्ना के अनुसार यह सारा डाटा अमित सिंह हम लोगों के साथ साझा किया है।

डॉक्टर का कहना है जो कि हर दिन समस्या बढ़ रहा है क्योंकि ताजा मामलों की संख्या भी बढ़ रही है और हमारी कैपेसिटी एक लिमिट तक है जिसे हम बढ़ाने में सक्षम नहीं हो पा रहे हैं। 

इस वजह से आए दिन कोरोना वायरस के संक्रमित मरीजों की संख्या में बढ़ोतरी देखा जा रहा है लेकिन वही कोरोना वायरस से संक्रमित मरीजों की रिकवरी रेट भी काफी अच्छी देखी गई है। 

 

  •  कोविड-19 से मरने वाले सरकारी डॉक्टर
  • 9 जून को अंबेडकर नगर जिला अस्पताल के मुख्य चिकित्सा अधीक्षक
  • डॉ एसपी गौतम जुलाई को लखनऊ के अस्पताल के
  • डॉ गणेश प्रसाद पूर्व जिलाधिकारी प्रयागराज 25 जुलाई को
  • 25 जुलाई को औरैया में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के
  • डॉ सुबोध कुमार 30 जुलाई को कासगंज जिला टीबी अधिकारी
  • डॉ पीएन गुप्ता 1 अगस्त को संयुक्त चिकित्सालय बलरामपुर के
  • डॉक्टर    मिश्रा और जनपद अतिरिक्त मुख्य चिकित्सा अधिकारी
  • 12 अगस्त को वाराणसी ताजपुर मुरादाबाद में काम कर रहे

डॉक्टर निजामुद्दीन को 20 अप्रैल का निधन हो गया भारत में स्थिर होने के बाद दोषी है। 

 

इंडियन मेडिकल एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष डॉ पी के गुप्ता ने कहा  कि 27 सरकारी डॉक्टरों ने नौकरशाहों द्वारा उत्पीड़न और आरोप लगाते हुए अपने प्रशासनिक पदों से इस्तीफा दे दिया है। 

जिससे आए दिन प्रॉब्लम बढ़ रही है यह डॉक्टर इसलिए इस्तीफा दिए क्योंकि यह सरकारी अफसरों द्वारा उत्पीड़न के मामलों में परेशान थे जिस वजह से इन्हें मजबूरन इस्तीफा देना पड़ा उत्तर प्रदेश प्रांतीय चिकित्सा स्वास्थ्य संघ राज्य के सभी जिलों में कोविड-19 सरकार के कामकाज में नौकरशाही हस्तक्षेप की जांच करने की मांग की है phase-1 कहा कि जब सरकारी डॉक्टर जान बचाने के लिए चौबीसों घंटे काम कर रहे थे तो कुछ नौकरशाही  मनोबल तोड़ रहे थे वह बार-बार डॉक्टरों को परेशान कर रहे थे। 

और अपने अजीबोगरीब फरमाइश के  बदौलत काम करने के दौरान बाधा उत्पन्न कर रहे थे जिस वजह से कुछ डॉक्टरों ने परेशान होकर अपने पदों से इस्तीफा दे दिया। 

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उत्तर प्रदेश राज्य सरकार को स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारियों से यह सुनिश्चित करना चाहिए कि प्रशासनिक अधिकारी सरकारी डॉक्टरों के पदाधिकारियों  के साथ गुरुवार  करें ‘पीएमएसएचए। के पूर्व अध्यक्ष डॉ बी आरसी ने हमें बताया कि उत्तर प्रदेश में लगातार सरकार ने स्वास्थ्य सेवाओं के प्रदेश में वरीयता नहीं दी है कोविड-19 महामारी ने हमारे स्वास्थ्य सुविधाओं को उजागर किया था राज्य सरकार को सरकारी अस्पतालों में स्थिति सुधारने की कोशिश करनी चाहिए थी। 

आधुनिक ‘उपकरणों,व सुविधाओं को उजागर किया गया था राज्य सरकार को सरकारी अस्पतालों में स्थिति सुधारने की आधुनिक उपकरणों की खरीद वाला की स्थापना के लिए अपने संसाधनों को बढ़ाने के लिए मजबूर किया था निदेशक अतिरिक्त निदेशक और संयुक्त निदेशक सहित बड़ी संख्या में पद खाली पड़े थे और उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य सुविधाएं चल रही है।

और मरीजों के इलाज कराने के लिए डॉक्टरों को मुफ्त में दवा देनी चाहिए कि के महानिदेशक चिकित्सा स्वास्थ्य की कार्यो में जोखिम अधिक था आप  इंतजार नहीं कर सकते हैं सभी साथियों को ध्यान में रखते हुए चिकित्सा देखभाल दी जाती है लेकिन लगभग 30 मिनट के लिए एक मामले में संपर्क में आने से होने का खतरा हो जाता है।

और ऐसे कई मामले भी हैं कोरोना वायरस  की वजह से करने के लिए अत्यंत सावधानी बरती गई थी उन्होंने कहा कि सुनिश्चित करने के लिए अत्यंत सावधानी बरती गई थी लेकिन लोग प्रोटोकॉल का पालन नहीं कर रहे थे।

 

डॉक्टर ने कहा कि हम  मानते हैं और प्रोटोकॉल के अनुसार काम करते हैं लेकिन सामान्य अस्पताल में  लोग घूमते हैं और आपको कभी पता नहीं चलता कि ट्रांस का कौन है। 

 

एक अन्य मुद्दा ताजा था डॉक्टर ने कहा इस साल एक नई नियुक्ति करने के लिए कोई प्रक्रिया नहीं की गई हमारी स्थिति के बीच इस वर्ष रिटायर डॉ लगभग ढाई सौ हो चुके हैं। 

डॉ सिंह ने कहा राज्य में संविदा पर काम करने वाले 16416 पद खाली है जिसे सरकार को जल्द से जल्द स्वास्थ्य विभाग के जरूरत की चीजों को पूर्ति करनी चाहिए था। इन सभी चीजों पर ध्यान देकर राज्य सरकार को इन सारी चीजों की खामियों को दूर करनी चाहिए जिससे कोरोना वायरस बीमारी  पर काबू पाय जा सके

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