केंद्र सरकार ने तेल कंपनियों को दिया निर्देश, प्रवासी मजदूरों के लिए अब बनाने होंगे 50,000 मकान

नई दिल्ली– केंद्र सरकार ने सार्वजनिक क्षेत्र की तेल कंपनियों को मजदूरों के लिए 50,000 मकान बनाने के निर्देश दिए, जिसमें से पेट्रोलियम मंत्रालय ने इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन, हिंदुस्तान पैट्रोलियम कॉरपोरेशन लिमिटेड, भारत पैट्रोलियम कॉर्प लिमिटेड, गेल इंडिया लिमिटेड और ओएनजीसी को अपने जमीनों पर प्रवासी श्रमिकों के लिए मकान बनाने का निर्देश दिया। 

कोरोना महामारी के चलते हुए एक राज्य से दूसरे राज्य गए मजदूरों को अन्य परेशानियों के साथ-साथ छत न मिलनेे की परेशानी का भी सामना करना पड़ा जिस वजह से वह अपने स्थान पर फिर से लौट गए। इसको देखते हुए सरकार ने इन श्रमिकों के लिए सुविधाओं को लेकर मंथन शुरू किया और उपर्युक्त बातों के निर्देश दिए।

मंत्रालय से निर्देश मिलने के पश्चात ही कंपनियों ने अपने आसपास प्रवासी मजदूरों के लिए मकान बनाने के लायक जमीनों की खोज प्रारंभ कर दी है। इन आवासों की खासियत यह है कि मकानों में बहुत कम किराया देना पड़ेगा, परंतु जहां एक ओर सेंट्रल गवर्नमेंट की ओर से प्रवासी मजदूरों के लिए मकानों की सुविधा उपलब्ध कराने का निर्देश दिए जाने को लेकर कई कंपनियां सहमत है। वहीं दूसरी ओर कुछ कंपनियों के अधिकारी सरकार की इस योजना से असहमत हैं। 

उपर्युक्त के बातों के पश्चात भी पेट्रोलियम मंत्री धर्मेंद्र प्रधान की अध्यक्षता में हुई मीटिंग में उन्होंने कंपनियों को आवासीय इकाइयों के लिए जल्द से जल्द योजना बनाने का निर्देश दिया। जिन कंपनियों के अधिकारी सरकार की इस योजना से सहमत नहीं हैं उनका कहना है कि रिफाइनरियों के समीप जमीन नहीं होती और इसलिए उन्हें नए मकान के  निर्माण में काफी दिक्कत का सामना करना पड़ेगा।

साथ ही पाइपलाइन जैसे प्रोजेक्ट्स भी दूर-दराज में होते हैं जहां प्रवासी मजदूर भी किराए पर नहीं रहना चाहेंगे। उनका कहना है कि जुलाई में  मजदूरों के लिए किराए के सस्ते घर बनाने की योजना को  सरकार ने मंजूरी दे दी थी और यह योजना सरकार की 2022 तक सभी को अपना घर मुहैया कराने की स्कीम का हिस्सा है। 

यह कदम उन मजदूरों के लिए उठाया गया जिन्हें कि कोरोना संकट के कारण दूसरे राज्य के शहर में ना कोई काम करने को मिला और ना ही रहने का ठिकाना, जिसके चलते उनको अपने घर निराश होकर वापस जाना पड़ा ।

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