पद्मश्री किसान रामसरन वर्मा के केला खेती की तकनीक पर आधारित प्रदेश में बनेगा टिश्यू कल्चर केला पौध तैयार करने के लिए लैब

उत्तर प्रदेश के पद्मश्री पुरस्कार से नावाजित किसान रामसरन  वर्मा द्वारा अपनाई गई केला खेती करने की तकनीक को काफी ज्यादा सहराया जा रहा है। उनके इस तकनीक को अपनाते हुए प्रदेश में अब टिशु कल्चर केला पौध तैयार करने हेतु लैब बनवाने की घोषणा की गई है। आपको बता दें बीते सोमवार को नगर के ओवरी में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने इस लैब के बनवाए जाने की घोषणा की। इसके अलावा उन्होंने किसान रामसरन वर्मा द्वारा अपनाई गई केला खेती तकनीक के विषय में चर्चा भी की।

इस कार्यक्रम के दौरान कृषि मंत्री ने इस बात का भी उल्लेख किया की जहां एक ओर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ-साथ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार उत्तर प्रदेश के किसानों की आय दुगनी करने के प्रयास में जुटी हुई है तो वहीं दूसरी ओर पद्मश्री पुरस्कार से नवाजित रामसरन वर्मा टिशू कल्चर के मदद से केले की खेती के जरिए आय को 4 से 5 गुना तक बढ़ाने में जुटे हुए हैं।

मिली जानकारी के अनुसार टिशू कल्चर केला के पौधे आंध्र प्रदेश के हैदराबाद के साथ-साथ गुजरात के लैब में तैयार किए जाते हैं और वहां से इन पौधों को उत्तर प्रदेश मंगवाया जाता है। हालांकि अब उत्तर प्रदेश में इस लैब के बन जाने से यहां के किसानों को बाहर जाने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी। इतना ही नहीं इससे बाहर से जो टिशु कल्चर केला के पौधे मंगवाए जाते थे उसमें होने वाले खर्च भी बचेगा और परिणाम स्वरूप किसान इससे ज्यादा से ज्यादा फायदा उठा सकेंगे।

कृषि मंत्री से पहले अपर निदेशक कृषि आनंद त्रिपाठी ने भी रामसरन वर्मा द्वारा अपनाए गए तकनीक जिससे केले की खेती के साथ-साथ टमाटर की खेती करके किसान अपनी आए कई गुना तक बढ़ा सकते हैं को लेकर उनकी काफी प्रशंसा की थी एवं उन्हें किसानों का रोल मॉडल भी घोषित किया था।

आपको बता दें बाराबंकी जिले के दौलतपुर गाँव के रहने वाले किसान रामसरन वर्मा को रोजगार सृजन को लेकर उनके द्वारा किए जा रहे प्रयासों के मद्देनजर उन्हें पद्मश्री पुरस्कार से नवाजा गया था।  

कृषि मंत्री के द्वारा की गई घोषणा जिसके तहत प्रदेश में अब टिशु कल्चर केला पौधा तैयार करने के लिए लैब बनवाया जाएगा को लेकर रामसरन वर्मा ने बयान जारी कर कहा है कि उत्तर प्रदेश में केला उत्पादन के लिए जैसी जलवायु की आवश्यकता है वैसी ही है और अब जब टिशु कल्चर केला की लैब यहां पर बनाई जाएगी तो इससे प्रदेश में होने वाले केले की खेती में एक तरह से क्रांति देखने को मिलेगी। जिससे किसानों की आय में वृद्धि के साथ-साथ और भी कई तरह के फायदे देखने को मिलेंगे।

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