गोमती नदी को मिलेगा मैलेपन से छुटकारा, नदी को प्रदूषित करने वालों की अब खैर नहीं ,जाने इस प्रोजेक्ट के बारे में ।

गोमती नदी को मिलेगा मैलेपन से छुटकारा, नदी को प्रदूषित करने वालों की अब खैर नहीं  ।

 

Lucknow, ( कुलसूम फात्मा )  नदियों को अब गंदा करने वालों की खैर नहीं है। क्योंकि अब ऐसा संयंत्र उसमें लगवाया जा रहा है जो की नदी की गुणवत्ता को बताएगा और इस मशीन के ज़रिये गुणवत्ता की इन्फॉर्मेशन अफसरों के मोबाइल तथा प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की वेबसाइट पर आती रहेंगी।

 

नदियों की गुणवत्ता की जांच तथा उस को स्वच्छ बनाने के लिए उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में प्रदेश का पहला फ्लोटिंग स्टेशन बनने जा रहा है। पायलट प्रोजेक्ट के रूप में इसको प्रारंभ करेंगे और इसका प्रारंभ गोमती नदी से पहली बार होगा इसके लिए सिंचाई विभाग ने एनओसी भी दे दी है। इसका आकर नोल नाव के जैसा है और इस संयंत्र के द्वारा सातों दिन तथा 24 घंटे नदीयों के पानी की गुणवत्ता की जांच करेगा और यह फ़्लौड़्क्षटग स्टेशन सोलर पावर से चलेगा।

और इस छोटे संयंत्र की खासियत सबसे बड़ी यह है कि इसको नदी या नाले में कभी भी लगाया जा सकता है और इसके साथ ही एक स्थान से दूसरे स्थान पर इसे ले जाया जा सकता है आसानी से।
इस फोरम को यूपी प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड मुंबई की कंपनी पीटी इकोलॉजिकल सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड ‘फ्लोङ्क्षटग ऑनलाइन रिवर मॉनिटरिंग सिस्टम लगवा रहा है।

 

यह प्लांट 1 मीटर गुणे 0.75 मीटर के छोटे शेप का है और इसमें किसी भी तरह का रसायन या फिर बिजली का इस्तेमाल नहीं होता है। लखनऊ में यह प्रयोग सफल रहा तो इसे प्रदेश की और भी नदियों तथा नालों में लगाया जाएगा जिससे नदियों और नालों के पानी की गुणवत्ता की जांच की जाए। साथ ही छोटे आकार वाली इस मशीन के द्वारा नदियों के जल और पीएच, टर्बिडिटी, कंडक्टिविटी, तापमान, ऑक्सीजन तथा अमोनियम आँयन, बायोकेमिकल ऑक्सीजन डिमांड और केमिकल ऑक्सीजन डिमांड, टोटल ऑर्गेनिक कार्बन सॉलिड्स, नाइट्रेट तथा क्लोराइड टोटल 18 मानकों के आंकड़े अफसरों के मोबाइल पर और साथ ही प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की वेबसाइट पर सूचित करते रहेंगे।

यदि इस फोरम की कीमत – 

यदि इस फोरम की कीमत की बात की जाए तो इस फोरम की कीमत तकरीबन ₹15 लाख है जबकि लखनऊ में कंपनी इसे मुफ्त ही लगा रही है। लखनऊ में इस संयंत्र की कार्य क्षमता देखी जाएगी और इससे प्राप्त होने वाले सभी आंकड़ों की गुणवत्ता सही पाई गई और क्षमता सही उतरी तो इसे उन नदियों नालों में भी लगाया जाएगा। जहां उद्योग का उत्प्रवाह आता है। साथ ही घर से निकले हुए जल मल निकलने वाले नालों में भी इसे स्थापित किया जाएगा। इसके लगने से नदियों तथा नालो के जल की गुणवत्ता का हर समय पता लगाया जा सकेगा। गड़बड़ी होने पर तुरंत ही इस पर कार्रवाई की जाएगी।

 

जाने संयंत्र के बारे में –

प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के सदस्य सचिव आशीष तिवारी से वार्तालाप करने के पश्चात पता चला कि यह ऑनलाइन मॉनिटरिंग सिस्टम से इस तरह के संयंत्र बोर्ड को और भी मजबूती मिलेगी। इसमें जीपीएस भी लगा है। स्टेशन अपनी लोकेशन भी बताएगा। उन्होने बताया की इसमें एक सिम भी लगा होगा जो पानी की गुणवत्ता को चेक करेगा और गुणवत्ता का अंदाजा लगा कर के आंकड़े में भेजता रहेगा। उन्होंने बताया कि यह फ्लर्टिंग स्टेशन नवम्बर या दिसंबर के पूर्व सप्ताह में गोमती नदी में लग जाएगा।

 

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