चौक में निकली बिजली के तारों से चिंगारियां लोगों में मचा हा- हा-कार जाने क्या हुआ था।

चौक में निकली बिजली के तारों से चिंगारियां लोगों में मचा हा- हा-कार जाने क्या हुआ था।

 

 

Lucknow, ( कुलसूम फात्मा )  राजधानी लखनऊ में नाक्खास का नाम तो आपने सुना ही होगा। वहां पर स्थित चौक , यह चिकन के कारोबार के लिए काफी मशहूर है। वहां पर शहर से ही नहीं सूबे के तकरीबन दो दर्जन जिलों से सर्राफा कारोबारी इस बाजार में आते जाते हैं। इसके साथ ही देश विदेश के लिए भी यहीं से चिकन का कारोबार किया जाता है।

 

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में स्थित चौक, जो कि चिकन कारोबार के लिए बहुत ज्यादा मशहूर यहां की गलियों में सबसे बड़ी समस्या यह है कि यहां पर केबल और बिजली के तार चौक गलियों के बीचों बीच में लटकते मिलते हैं और आए दिन घटनाएं घटित होती रहती हैं। कभी इन बिजली की तारों से चिंगारियां निकलती हैं तो कभी तार टूट कर गिर जाते हैं।और ऐसा नहीं है कि इसकी सूचना विभागीय जिम्मेदारों को दी नहीं गई है। सब कुछ वह जानते हैं, उसके बाद भी इसको सही करने का कदम नहीं उठा रहे

जो सूचना देने जाता है उनको आश्वासन देकर के वह वापस कर देते हैं। इसी दौरान जो बीते दिनों में त्योहारी सीजन आऐं उसमे इन्ही तारों के कारण कई दफा बाजार में हलचल मच गई थी। उसकी वजह यह थी कि बिजली के लटकते हुए तार झूल रहें है और बंदरों के झुन्ड के आने से चिंगारियां फूटते देख चौक की गलियों में हाहाकार मच गई थी। काफी देर तक ये खौफ का आलम बाजार में रहा और जब बंदरों को भगाया गया तो व्यापारियों ने फिर से कार्य को करना शुरू किया और इसकी सूचना जब विभागीय जिम्मेदारों को दी गई तो उन्होंने कोई इसपर ध्यान नहीं दिया ।

बिजली विभाग के जिम्मेदार इन तारों पर बिल्कुल भी ध्यान नहीं दे रहे हैं। सूचना देने के पश्चात भी यह इसे अनदेखा कर दे रहे हैं जबकि चौक बाजार का हाल यह है की यह लटकते तार के झुंड अब बहुत ही नीचे तक आ गए हैं और हाथ बढ़ाने पर यह हाथ से टकराते हैं। यही नहीं दुकानों और कॉन्प्लेक्स की रेलिंग से तारों का मकड़ी का जाला जैसे अबतो दिखता है। अब कहां करंट उतर जाए, इसका कुछ नहीं पता है। इसको देख कर के ऐसा लगता है कि यहां पर किसी भी समय दुर्घटना घटित हो सकती है। और बाजार में 1 दिन भगदड़ भी मच गई थी। इससे संबंधित कई बार जिम्मेदारों को जानकारी भी दी गई लेकिन अभी तक के किसी तरीके का ठोस कदम नहीं उठाया गया है

अनुराग रस्तोगी के अनुसार –

त्योहार के सीजन में हालात बहुत ही दयनीय हो गए थे और भीड़ भी काफी अधिक थी और साथ ही जब यह दुर्घटना घटित हुई थी तो लोग बहोत सहेम से गये थे परन्तु आज भी इसमें सुधार नहीं किया गया। इस जर्जर तारों पर झूलते बंदरों से किसी भी दिन हादसा होने की सम्भावना है।

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