दुनिया ने देखा बुंदेलखंड को नजदीक से जब बुंदेलखंड ने देश के राज्यों में मचाई धूम।

दुनिया ने देखा बुंदेलखंड को नजदीक से जब बुंदेलखंड ने देश के राज्यों में मचाई धूम।

 

वर्तमान समय में बुंदेलखंड ने 10 देशों के लोगों के दिल में अपनी जगह बना ली है। बुंदेलखंड विरासतन थाती के लिए मशहूर है। परंतु अब दिवारी नृत्य के कारण बुंदेलखंड जाना जा रहा है। और यह दुनिया में पूरी तरह से छा गया है।

युगदृष्टि संस्था दिवारी नृत्य के लेखक डॉ जनार्दन प्रसाद त्रिपाठी से बातचीत करने के पश्चात पता चला कि इस कला की शुरुआत त्रेता युग में भगवान श्री राम के लंका विजय के पश्चात दिवाली  पर अयोध्या पहुंचने पर किया गया था।

बताया कि लोग अब नई नई चीजों से वाकिफ होना चाहते हैं इसलिए सब कुछ अब धीमे-धीमे समाप्त होता जा रहा है। बुंदेलखंड बांदा के प्राथमिक पाठशाला बड़ोखर खुर्द के मैदान में योग दृष्टि संस्था के जरिए इस गौरवशाली दिवारी नृत्य का आयोजन किया गया तो विभिन्न देशों ने इसे बहुत पसंद किया। और इसका वास्तविक प्रसारण देश के विभिन्न प्रांतों के साथ-साथ लगभग 10 देशों में देखा गया उन देशों में अमेरिका, इटली, फ्रांस पोलैंड, कनाडा नार्वे स्वीडन स्पेन फिनलैंड जर्मनी अमृत है। यहां के लोगों ने बुंदेलखंड के इस लोक नृत्य को घर बैठे खूब आनंद लिया और तारीफें की।

अमेरिका की डांस थेरेपी की चिकित्सीय सिमरन कौर के अनुसार –

डांस थेरेपी की चिकित्सक सिमरन कौर ने शुभारंभ किया दिवारी नृत्य कला के  गायक  श्रीपाल, दिवारी गायक बाबू ने जब राग-चंपा त्वहमा तीन गुन, रंग-रूप और बांसा रे, और गुण त्वहमा कौन है कि भौंरा न आवय पासा रे। चंपा राधा बरन है, भंवरा न आवै पासा रे, माता अपनी जान के, भंवरा न आवै पासा रे………  किया तो दिवारी कलाकार जोश के साथ ऊंची कूद लगाने लगे और एक दूसरों से लाठियों के साथ भिड़ने लगे। यह इनका दिवारी नृत्य करने का अंदाज था।

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