नए महीने की शुरुआत में भी नहीं थम रहा लखनऊ शहर में कोरोना का प्रकोप, बीते 24 घंटे में 11 नए मरीजों ने गवाई अपनी जान

लखनऊ: मार्च महीने से शुरू हुआ कोरोना महामारी का प्रकोप थमने का नाम नहीं ले रहा है। यूं तो नए महीने यानी अक्टूबर की शुरुआत हो चुकी है मगर फिर भी जो नहीं थमा है वह है कोरोना से संक्रमित होने वाले व्यक्तियों की संख्या के साथ साथ इस बीमारी से मरने वाले लोगों की संख्या।

बात अगर महीने की पहली तारीख यानी 1 अक्टूबर की करें तो 1 दिन में इस बीमारी से संक्रमित होने वाले मरीजों की संख्या 596 रही। जिस वजह से एक बार फिर कोरोना से संक्रमित मरीजों की संख्या में इजाफा देखने को मिला और यह संख्या 53493 हो चुकी है। 

वही बात इस बीमारी से ठीक हो चुके मरीजों की करें तो अब तक लखनऊ जिले में 949 मरीज इस बीमारी से ठीक हो चुके हैं। हालांकि अभी 14 दिनों तक उन्हें होम कोरेंटिन में रहने का निर्देश दिया गया है।

बात अगर बाकी के मरीजों की करें तो  बीते गुरुवार 143 मरीज को हॉस्पिटल का आवंटन किया गया जिसमें से 113 मरीजों को शाम तक अस्पताल में शिफ्ट कर दिया गया। वहीं बाकी के 30 मरीजों को होमआईसोलेशन में रखा गया है।

मिली जानकारी के अनुसार आपको बता दें अब तक होम आइसोलेशन में कुल 38739 रोगी रह चुके हैं जिनमें से 34183 इस होम आइसोलेशन की समय सीमा समाप्त कर चुके हैं। गौरतलब है कि कोरोना संक्रमित मामलों में से मौजूदा समय में 4556 केसेस सक्रिय हैं। 

बात अगर इस बीमारी की वजह से जिन मरीजों ने अपनी जान गवाई उनकी संख्या की करें तो अक्टूबर महीने की पहली तारीख को कुल 11 मरीजों ने अपनी जान गवा दी। इस बीमारी के वजह से जिन 11 लोगों ने अपनी जान गवाई उनमें से 6 मरीज लखनऊ शहर से ताल्लुक रखते हैं। वही बाकी के 2 मरीज रायबरेली से, एक मरीज अयोध्या से एवं एक-एक मरीज संत रविदास नगर तथा अंबेडकर नगर से ताल्लुक रखते हैं। बीते गुरुवार 11 लोगों की हुई मौत के साथ ही लखनऊ जिले में कोरोना से होने वाले व्यक्तियों के मौत के आंकड़ों में इजाफा देखने को मिला और यह संख्या 709 पहुंच गई।

राजधानी में लगातार बढ़ रही कोरोना से संक्रमित होने वाले मरीजों की संख्या लोगों के बीच एक चिंता का विषय बन चुका है। हालात ऐसे हैं की संक्रमित होने वाली मरीजों को वेंटिलेटर सपोर्टेड बेड तक मिलना मुश्किल हो गया है। इन परिस्थितियों में मजबूरन उन मरीजों को निजी अस्पतालों में भर्ती होना पड़ा है जहां उन्हें अच्छे खासे पैसे भी फीस के तौर पर चुकाने पड़ रहे हैं।

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