पतंग के चाइनीस मांझा तार ने बिजली के साथ-साथ मेट्रो के चलने में भी की रुकावट।

पतंग के चाइनीस मांझा तार ने बिजली के साथ-साथ मेट्रो के चलने में भी की रुकावट।

 

लखनऊ,( कुलसूम फात्मा ) नवाबों के शहर लखनऊ कई मामलात के साथ मशहूर होने के साथ पतंग उड़ाने के शौक रखने वाले लोगों से भी जाना जाता है।अपने इस शौक को पूरा करने वाले लोग शाम के वक्त छत पर जाकर पतंग उड़ाते हैं और उन पतंगों से लिपटे हुए तार जाकर के बिजली की लाइन से लिपट जाते हैं  पिछले दिनों इस से संबंधित कई मामले सामने आए हैं

अभी तक की यही सुनने में आ रहा था कि बिजली ना आने का कारण कभी-कभी चाइनीज मांझा तार बन जाता है। परंतु अब तो इस चाइनीज मांझा तार ने मेट्रो के संचालन में भी रुकावटें पैदा करना प्रारंभ कर दी हैं। बिजली के मामले में हर माह 18 से 20 बार लाइन ट्रिप होती सुनाई पड़ती है जिसके कारण लोग परेशान होते हैं और इस लाइन को चालू करने में तकरीबन 2 से डेढ़ घंटे तो लग ही जाते हैं। यही नहीं इस व्यवस्था को दुरुस्त करने में पूरे वर्ष में तकरीबन 4 करोड रुपए का खर्च हो जाता है।

यही नही पतंग के इस इस्तेमाल होने वाले चाइनीज मांझा तार ने अब मेट्रो के संचालन में भी रुकावट पैदा करना शुरू कर दी 2017 से अब तक के दर्जनों बार यह खामियां सामने आई इन तारों के कारण मेट्रो चलने में काफी बार रुकावटें पैदा हुए हैं। यूपीएमआरसी ने 23 किलोमीटर के रूट में यदि पटरियों के किनारे किनारे थर्ड लाइन के द्वारा करंट दौड़ आया होता तो शायद आज मेट्रो खड़ी ना हो जाती।
इस थर्ड लाइन के जरिए करंट दौडा़ने का कार्य कानपुर मेट्रो में किया गया लखनऊ के चारबाग से बसंत कुंज के बीच मेट्रो चलती हैं। इसलिए लखनऊ मेट्रो को थर्ड लाइन पर ही फोकस करना उचित होगा।

इन रूटों पर नहीं होती है कोई भी दिक्कतें।

चौधरी चरण सिंह मेट्रो स्टेशन से लेकर के आलमबाग तक के मेट्रो को किसी भी प्रकार की दिक्कत का सामना नहीं करना पड़ता है। इसकी वजह यह है कि पतंग ना के बराबर वहां पर उड़ती है। जैसे ही मेट्रो मवैया के आसपास आती है बस यह दिक्कत वहीं से आना प्रारंभ हो जाती है पतंगों में बाधा चाइनीज मांझा तार मेट्रो को रोक लेता है। अब मेट्रो ईस्ट वेस्ट कॉरिडोर के डीपीआर में थर्ड लाइन को लेकर के संशोधन करने पर विचार विमर्श किया जा रहा है। जिससे की मेट्रो की लाइन पूरी तरह से क्लियर रहे ।

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