बरसों की अधूरी हसरतों को पूरा किया स्वयं सहायता समूह ने।

बरसों की अधूरी हसरतों को पूरा किया स्वयं सहायता समूह ने।

 

लखनऊ ( कुलसूम फात्मा ) सरकार अब गांव की उन महिलाओं को तरक्की के रास्ते पर लाना चाहती हैं जोकि पैसे ना होने के कारण घर के कामों में ही अपना जीवन व्यतीत कर देती हैं। गांव की महिलाएं केवल घर के लिए बनी है सरकार ने इस रीति को तोड़ने के लिए स्वयं सहायता समूह योजना चलाई और इसके द्वारा इन महिलाओं को सहायता प्रदान की। इस योजना के द्वारा गांव का विकास भी संभव है।

उनमें से एक महिला शबीना भी है। शबीना स्नातक ही हुए हैं और सभी ना बताती हैं कि मैं स्वयं सहायता समूह से जुड़ी उसके पश्चात मैंने सोचा कि स्वयं का कोई कार्य किया जाए और मैंने इस समूह के द्वारा 50 हजार लेकर मूर्ति बनाने का कार्य प्रारंभ कर दिया

और इस मूर्ति बनाने के कार्य से जब मुझे फायदा हुआ तो मैंने ₹25000 समूह को अदा भी कर दिए। सबीना बताती हैं की दीपावली तथा नवरात्रि में मूर्ति का कार्य सबसे अधिक चलता है। इसमें 1 साल में तकरीबन 70 हजार की बचत हो जाती है। सबीना आज अपने मां और बाप तथा तीन बहनों की जिम्मेदारी उठा रही हैं। वह कहती हैं की मेरी यह ख्वाहिश थी कि मैं अपने परिवार के साथ कुछ करूं और मेरी यह हसरत इस समूह के द्वारा पूरी हुई।

 

सावित्री चौरसिया की जुबानी –

सावित्री चौरसिया जोकि मलिहाबाद ब्लॉक की ससपन पंचायत के अटरे मजरे की निवासी है और यह वर्तमान समय में स्वयं सहायता समूह की सहायता से ही स्वयं पर निर्भर हुई है।

सावित्री चौरसिया बताती हैं की मैंने सब्जी की खेती का कार्य 25 हजार रुपए लेकर के प्रारंभ किया था और 2 साल के पश्चात यह कार्य चल गया तो मैं कुंदुरू परवल को बाजार में बेचने का कार्य शुरू किया बताती हैं की इसमें बहुत अच्छा मुनाफा होता है और आज के समय में वह स्वयं पर निर्भर हो गई है।

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