बाबरी मस्जिद विध्वंस केस: काम नहीं आई सीबीआई की दलीलें बचाव पक्ष के वकीलों की आगे

गौरतलब है कि बीते बुधवार यानी 30 सितंबर को 28 साल से चल रहे बाबरी मस्जिद विध्वंस केस की अंतिम सुनवाई की गई। जहां सीबीआई की विशेष अदालत ने अपना फैसला सुनाते हुए सभी आरोपियों को आरोप मुक्त कर दिया।

हालांकि  चल रहे सुनवाई के दौरान सीबीआई की ओर से कई सारी दलीलें दी गई। मगर ऐसा लग रहा था मानो उन दलीलों का काट वहां मौजूद बचाव पक्ष के वकीलों ने पहले से ही तैयार कर रखा था।  आपको बता दें अयोध्या के विवादित ढांचे विध्वंस केस की सुनवाई के दौरान कुल 7 वकील बचाव पक्ष की ओर से वहां मौजूद थे। 

सीबीआई की ओर से इस केस में जितने भी तथ्य पेश किए गए थे उन सारे तथ्यों को इन वकीलों द्वारा नकार दिया गया और उन्हें बेबुनियाद बताया गया।

एक नजर बचाव पक्ष के उन 7 वकीलों पर

आइबी सिंह – बचाव पक्ष के वकील आइबी सिंह ने कहा कि कोर्ट ने  सीबीआई के द्वारा  पेश की गई सभी दलीलों को आधारहीन बताते हुए नकार दिया  सीबीआई ने  कुछ तस्वीरें जो सबूत के तौर पर कोर्ट में पेश की थी  उन तस्वीरों के सत्यता प्रमाणित करने हेतु  जिस नेगेटिव की जरूरत पड़ती है  उनकी ओर से  वह तस्वीरों के साथ अटैच नहीं किया गया था  जिस वजह से  कोर्ट ने उन तस्वीरों को सबूत के तौर पर स्वीकार नहीं किया।

केके मिश्र – कोर्ट द्वारा सुनाए गए फैसले से संतुष्ट बचाव पक्ष के वकील केके मिश्रा ने अपनी प्रसन्नता जाहिर करते हुए कहा की आज सच्चाई की जीत हुई है। साथ ही साथ उन्होंने सीबीआई द्वारा पेश किए गए सबूतों के विषय में भी कहा की सीबीआई कोर्ट के समक्ष एक भी तथ्यात्मक सबूत पेश करने में विफल रही थी। जिस वजह से उनके द्वारा जो षड्यंत्र करने का आरोप दोषियों पर लगाया गया था उसे कोर्ट द्वारा नकार दिया गया।

विमल श्रीवास्तव –  सीबीआई द्वारा पेश किए गए गवाहों एवं सबूतों के बारे में बताते हुए बचाव पक्ष के वकील विमल श्रीवास्तव ने सीबीआई पर निशाना साधते हुए कहा कि उन्होंने कोई भी सबूत या गवाह सही तरीके से कोर्ट में पेश नहीं किया। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि ऐसा करके सीबीआई कोर्ट को गुमराह करना चाहती थी ताकि हमारे मुवक्किलों को दोषी करार कर दिया जाए।

अभय प्रताप –  गौरतलब है कि सीबीआई के द्वारा जितने भी ऑडियो या वीडियो कोर्ट में पेश किए गए थे वे सभी बिना किसी फॉरेंसिक रिपोर्ट के जमा किए गए थे। बचाव पक्ष के वकील अभय प्रताप ने साथ ही यह भी कहा कि बिना किसी फॉरेंसिक रिपोर्ट के किसी भी ऑडियो या वीडियो कैसेट के  प्रमाणिकता पर सवाल खड़े हो जाते हैं।

प्रशांत सिंह – बचाव पक्ष के एक और वकील प्रशांत सिंह ने बयान जारी कर कहा कि इतने सालों तक इतनी बार जिरह करने के बावजूद सीबीआई इस बात को साबित करने में असफल रही थी कि जिन लोगों को उन्होंने दोषी करार दिया था उनका हाथ इस घटना में शामिल था। साथ ही साथ उन्होंने इस बात का भी दावा किया कि जितने भी सबूत कोर्ट में पेश किए गए उनके साथ कहीं ना कहीं छेड़छाड़ की गई थी।

अभिषेक रंजन – बचाव पक्ष के वकील अभिषेक रंजन ने सीबीआई से सवाल करते हुए कहा कि अयोध्या के विवादित ढांचे के विध्वंस से जुड़े इस केस में सीबीआई को ऐसे कई सवाल थे जिनके जवाब उन्हें देने थे। मगर इस केस के आखिरी दिन तक भी सीबीआई की ओर से उन मुख्य सवालों के जवाब पेश नहीं किए गए। जिस वजह से कहीं ना कहीं उनके द्वारा दिए गए तथ्य बेबुनियाद साबित हो गए।

मनीष त्रिपाठी – बचाव पक्ष के साथ वकीलों में की सूची में जो आखिरी नाम है वह है मनीष त्रिपाठी का जिन्होंने भी सीबीआई द्वारा कोर्ट में पेश किए गए ऑडियो और वीडियो कैसेट पर सवाल खड़े किए। उन कैसेट के  कहीं से भी यह तथ्य सिद्ध नहीं हो पाया की घटना के वक्त मौजूद कारसेवकों को तत्कालीन विहिप नेता अशोक सिंहल या साध्वी ऋतंभरा सहित दूसरे तमाम नेताओं द्वारा भड़काया जा रहा था।

 

दिलचस्प बात यह की बचाव पक्ष के तमाम सातों वकीलों को पहले से ही पूर्ण रुप से विश्वास था कि फैसला उनके हक में ही जाएगा। गौरतलब है कि जैसे ही सीबीआई की विशेष अदालत ने अपना फैसला इस केस में जो दोषी पाए गए थे उनके हक में दिया तो वहां मौजूद आरोपितों के साथ सभी वकीलों के चेहरे पर खुशी देखने लायक थी

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