उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के स्कूलों में से शिक्षक नदारद, प्रशासन द्वारा अगर खोले गए स्कूल तो कैसे पढ़ेंगे उन स्कूलों में मौजूद बच्चे

लखनऊ:  एक ओर पूरा देश अनलॉक 5 की ओर बढ़ चुका है जिसके तहत इतने महीनों से बंद पड़ी सभी सेवाओं को शुरू किया जा रहा है। इन्हीं सेवाओ में विद्यालयों को भी शामिल किया गया है जो मार्च महीने से ही लॉकडाउन लगाए जाने की वजह से बंद पड़े थे। ऐसे में प्रदेश की राजधानी लखनऊ से एक चिंता करने वाली समस्या उत्पन्न हुई है। एक ओर वहां के प्रशासन 15 अक्टूबर को माध्यमिक विद्यालयों में शिक्षण कार्य शुरू करने हेतु सभी बच्चों को बुलाने की तैयारी में जोर शोर से लगी हुई है। वहीं दूसरी ओर लखनऊ के नगर क्षेत्र में स्थित ऐसे कई परिषदीय विद्यालय है जहां पर शिक्षकों की भारी संख्या में कमी दर्ज की गई है।

आपको बता दें आंकड़ों के हिसाब से लखनऊ शहर के नगर क्षेत्र में जोन एक, दो, तीन और चार में लगभग 254 विद्यालय हैं। जिनमें से 22 ऐसे विद्यालय हैं जहां से शिक्षक नदारद है यानी उन विद्यालयों में एक भी शिक्षक मौजूद नहीं है।

एक नजर आंकड़ो पर

प्राथमिक विद्यालयों की सूची जहाँ है शिक्षकों का अभाव – 

  • जोन एक – अमीनाबाद, आजादनगर, बाजार झाऊलाल, बेहसा-एक, बेहसा-दो, मुक्ति खेड़ा। 
  • जोन दो – चक्कर पुरवा, धनेहर खेड़ा, गौरी खेड़ा-एक, गौरी दो, गोदौंदा, हैवतमऊ मवैया, हसनपुरिया। 
  • जोन तीन – कुंडरी रकाबगंज, मार्टिन पुरवा, लोकमान गंज, मारवाड़ी गली, मटियारी, नया गदौरा, रानीगंज। 
  • जोन चार –  शंकर पुरवा, उदयगंज। 

इसके अलावा 69 ऐसे विद्यालय भी हैं जहां केवल एक शिक्षक के द्वारा ही पूरे विद्यालय को संचालित किया जा रहा है। यह आलम यहां पर ही खत्म नहीं होता इस क्षेत्र में कई ऐसे विद्यालय भी हैं जहां अगर शिक्षक मौजूद नहीं है तो वहां दूसरे विद्यालय के शिक्षा मित्र को भेज दिया जाता है। इन सबके अलावा इस क्षेत्र में ऐसे कई विद्यालय मौजूद है जहां शिक्षकों की कमी की वजह से बच्चों को एक विद्यालय से दूसरे विद्यालय भेजे जाने की व्यवस्था की जाती है। उन्हीं विद्यालयों में से एक प्राथमिक विद्यालय पिपराघाट का है जहां शिक्षकों के अभाव की वजह से इस विद्यालय के बच्चे कैबिनेटगंज प्राथमिक विद्यालय भेजे जाते हैं।

एक नजर आंकड़ो पर

विद्यालय जहाँ चलती हैं एकल शिक्षक व्यवस्था –

  • जोन एक के 20 विद्यालयों में। 
  • जोन दो के 19 विद्यालयों में। 
  • जोन तीन के 20 विद्यालयों में। 
  • जोन चार के 10 विद्यालयों में। 

इन समस्याओं को लेकर अलग-अलग अधिकारी अपने अपने सुझाव साझा कर रहे हैं। आइए देखते हैं एक नजर किसके क्या सुझाव है – 

उत्तर प्रदेश शिक्षा अधिकारी प्रदेश अध्यक्ष के अनुसार – 

प्रवीण शुक्ला जोकि उत्तर प्रदेश के शिक्षा अधिकारी प्रदेश अध्यक्ष खंड है के मुताबिक “जब शिक्षकों की भर्ती बेसिक शिक्षा परिषद द्वारा की जाती है तो वैसे परिस्थिति में नगर और ग्रामीण का कैडर अलग अलग ना होकर प्रशासन को उसे एक कर देना चाहिए इससे परिणाम यह निकलेगा कि जहां जितने स्वीकृत पद हैं वहां पर उसी के अनुरूप तैनाती कर दी जाएगी और दोनों की अलग-अलग भर्ती नहीं करनी पड़ेगी।”

प्रशिक्षित स्नातक एसोसिएशन के प्रांतीय अध्यक्ष के मुताबिक – 

विनय कुमार सिंह जो कि प्रशिक्षित स्नातक एसोसिएशन के प्रांतीय अध्यक्ष है के मुताबिक शासन को नगर क्षेत्र की सेवा नियमावली में संशोधन करते हुए बिना ज्येष्ठा खोये ग्रामीण क्षेत्रों के शिक्षकों नगर क्षेत्र में समायोजित करना चाहिए। इस दौरान उन्होंने कई महत्वपूर्ण बातों की ओर भी रोशनी डालने की कोशिश की उन्होंने बताया कि क्षेत्र में 45 फ़ीसदी ऐसे विद्यालय हैं जहां पर या तो शिक्षक मौजूद नहीं है या फिर एकल शिक्षक की व्यवस्था है। इसके अलावा उन्होंने यह भी कहा कि लगभग 11 सालों से शिक्षकों की भर्ती नहीं हुई है

शहर की मौजूदा परिस्थिति को देखते हुए यह सवाल उठाना लाजमी है कि जब विद्यालयों में शिक्षक ही मौजूद नहीं रहेंगे तो उन बच्चों के भविष्य का क्या होगा जो वैसे स्कूलों में पढ़ने जाएंगे। बिना शिक्षकों के ना तो उनकी कक्षाएं सही तरीके से चल पाएंगी ना ही मानक के अनुरूप उनका कोर्स पूरा हो सकेगा। और इन हालातों में उन बच्चों का भविष्य कैसे बनेगा यह वाकई में अपने आप में एक बड़ा सवाल खड़ा करता है।

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