रोड पर भी मोबाइल से दूरी बर्दाश्त न कर पाने वालों की 99% लोगों की हो रही है मौत।

रोड पर भी मोबाइल से दूरी बर्दाश्त न कर पाने वालों की  हो रही है मौत। 

 

लखनऊ,( कुलसूम फात्मा )    मोबाइल से घटित घटनाएं बढ़ती जा रही हैं। लोगों को मोबाइल इस्तेमाल करना है। यह तो याद है परंतु कहां पर यह भूल गए हैं मोबाइल का उपयोग करना लाभदायक है, परंतु हानिकारक भी है। लोग यह भी भूल चुके हैं।
मोबाइल से हुए हादसे दिन पर दिन बढ़ते जा रहे हैं। लोग यह भूल चुके हैं कि रोड पर चलते हुए बात करना या फिर इंटरनेट चलाना उनसे उनका जीवन छीन सकता है।

राजधानी लखनऊ के केजीएमयू ट्रामा सर्जरी विभाग से पता चला के 99% पुरुष तथा 1 % महिलाएं चोटिल होकर आती हैं जिसका कारण मोबाइल होता है।
केजीएमयू ट्रामा सर्जरी विभाग ने बताया कि आई यह लोग जो आते हैं, इनकी उम्र तकरीबन 18 से 49 साल होती है। इन्होंने खुद कबूला की कभी रोड एक्सीडेंट होकर आया मरीज इंटरनेट चलाता हुआ घायल हुआ तो कभी फोन पर बात करते हुए एक्सीडेंट हो गया यह लोग गंभीर तरीके से एक्सीडेंट के शिकार होते हैं।  डॉक्टर बताते हैं कि इनमें से कुछ की तो बुरी तरह से मौत भी हो जाती है।

रोड पर व्हाट्सएप चलाते लोग।

विभाग के डॉक्टर समीर मिश्री से वार्तालाप करने के बाद पता चला कि जो लोग घायल होकर के ट्रामा में आते हैं, सर्जरी कराने के लिए उनमें कुछ तो ऐसे होते हैं जो कि रोड पर व्हाट्सएप चलाते हुए चोटिल हो जाते हैं।
यह कहते हैं कि इनको संदेश भेजने की ज्यादा जल्दी होती है परंतु रोड क्रॉस करने की जल्दी नहीं होती है। इनकी संख्या तकरीबन 10% होगी जो लोग व्हाट्सएप हादसे में घायल होकर के सर्जरी कराने के लिए आते हैं।

ऐसे लोग जो फोन पर बात करते हुए चोटिल होते हैं।

डॉक्टर ने बताया कि कुछ लोग तो कॉल पर बात करते करते इतना कॉल में खो जाते हैं कि सड़क के किनारे से बीच में बहुत जाते हैं और उनको पता ही नहीं चलता है कि वह कहां से कहां पहुंच गए हैं और बस उनको गाड़ी आकर उड़ा देती है उसके बाद वह सर्जरी विभाग में
आकर हमसे मुलाकात करते हैं। इनकी संख्या तकरीबन बताते हैं कि 11% होगी जो कि फोन पर बात करते हुए चोटिल होकर आते हैं।

समीर मिश्र कहते हैं कि ऐसे लोग भी कुछ होते हैं जो कि नशे में गाड़ी चलाते हैं और दूसरे लोगों की भी जान जोखिम में डालते हैं और खुद भी अपनी जान की परवाह नहीं करते हैं। ऐसे लोगों की संख्या 2 से 3% है। सबसे ज्यादा इनके हाथ तथा पैर फैक्चर होते हैं पर तथा छाती में चोट लगती है और हादसे में सिर में चोट लगने का अंदेशा इनको अधिक होता है।

गाड़ी चलाते हुए इन बातों का रखें ख्याल।

बात करना जरूरी हो तो गाड़ी किनारे रोक कर ही बात करें ,और गाड़ी चलाते समय मोबाइल पर बात ना करें तो बेहतर होगा। कार चलाते वक्त सीट बेल्ट आवश्यक लगाएं तथा गाड़ी की रफ्तार को कम रखें। नशे में गाड़ी ना चलाएं जिससे कि दूसरों की जान को भी नुकसान हो। हेलमेट लगाकर दो पहिया वाहन चलाएं। यातायात नियमों का पूरी तरह से पालन करें।

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