लखनऊ।गोमती नगर के एसएचओ ने अपने थाने के गेट पर कानून की देवी को पीछे से पैसा लेते हुए पेंटिंग बनवा दीया।  

जरा इधर भी गौर फरमाइए।  

लखनऊ के एसएचओ गोमती नगर ने अपने थाने के गेट पर कानून की देवी को पीछे से पैसा लेते हुए पेंटिंग बनवा दीया।  

कुछ वकीलों ने हल्ला किया तो आनन-फानन में पेंटिंग मिटाने की कोशिश की गई।  

 चलिए आज हम बात करते हैं भ्रष्टाचार के बारे में यह फोटो जो आप देख रहे हैं लखनऊ का फोटो है।  

भारत में भ्रष्टाचार चर्चा और आंदोलन एक मुख्य विषय रहा है  आजादी के एक दशक बाद से ही भारत भ्रष्टाचार के गंदी दलदल में फंसता गया और कसता ही जा रहा है और दलदल में धंसा नजर आने लगा था। 

उस समय संसद में इस बात पर बहस होती थी 21 दिसंबर 1963 को भारत में भ्रष्टाचार  के कई मामले  आए थे जिसे संज्ञान में लेते हुए उस वक्त के भावी लोग संसद में इस पर बहस करते थे बहस में डॉ राम मनोहर लोहिया ने एक बहुत बढ़िया भाषण दिया था वह आज भी प्रासंगिक है। 

उस वक्त डॉक्टर लोहिया ने कहा था सिंहासन और व्यापार के बीच जो रिश्ता इंडिया में दूषित और भ्रष्ट होता जा रहा है दुनिया में कोई भी देश का इतिहास ऐसा नहीं है। 

भ्रष्टाचार से इंडिया की इकोनामिक पावर और इकोनामिक कंडीशन अर्थव्यवस्था और प्रत्येक व्यक्ति पर विपरीत प्रभाव पड़ता है।

भारत में पॉलिटिकल पार्टी एवं नौकरशाही का दबदबा भ्रष्टाचार बहुत ही व्यापक है इसके अलावा न्यायपालिका मीडिया सेना पुलिस आदि में भी भ्रष्टाचार व्याप्त  है। 

2005 में इंडिया में ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल नामक एक संस्था द्वारा किए गए एक अध्ययन में पाया गया कि 62% से अधिक भारतीय को सरकारी कार्यालय में अपना काम करवाने के लिए रिश्वत या उसे दर्जे के प्रभाव का प्रयोग करना पड़ेगा और पड़ा वर्ष 2008 में पेश की गई इस संस्था की रिपोर्ट ने बताया कि भारत में लगभग 20 करोड़ की रिश्वत अलग-अलग लोक सेवकों को  जिसमें न्यायपालिका सेवा के लोग भी शामिल है।  और उसने दी जाती है।

उन्हीं का निष्कर्ष है कि भारत में पुलिस कर एकत्र करने वाली विभागों में सबसे ज्यादा भ्रष्टाचार है आज एक कटु सत्य है कि जिस किसी भी शहर के नगर निगम में रिश्वत दिए बगैर कोई मकान बनाने की अनुमति नहीं मिलती इसी प्रकार सामान्य व्यक्ति भी यह मान कर चलता है कि किसी भी सरकारी महकमे में बिना रिश्वत दिए कोई काम आप नहीं करवा सकते या असंभव सा लगता है। 

भ्रष्टाचार अर्थात भ्रष्ट प्लस अचार। भर्स्ट  यानी बुराई बिगड़ा हुआ तथा अचार का मतलब आचरण अर्थात भ्रष्टाचार का शाब्दिक अर्थ है।

जो किसी भी प्रकार से अनैतिक और अनुचित हो उसे ही हम भ्रष्टाचार कहते हैं।  

किसी को निर्णय लेने की क्षमता है उसका अधिकार है या उसको पावर है तो एक दूसरे पर पक्ष धारी निर्णय ले सकता है। 

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