लखनऊ के मेले में एक बार फिर महिलाओं ने दिया आईने को दान , जानिए दान करने का आईना क्या है कारण ?

लखनऊ के मेले में एक बार फिर महिलाओं ने दिया आईने को दान , जानिए दान करने का आईना क्या है कारण ?

 

 

 

लखनऊ,( कुलसूम फात्मा )  उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में मुगलकालीन से खूबसूरत द्वितीया पर हटिया मेला लगता चला रहा है।
यह सभी मेलों में खास मेला माना जाता है क्योंकि इस मेले में महिलाएं कुछ खास ही करती हैं। यह मेला कानपुर रोड पर स्थित साईं नदी के पुल के समीप लगता है और यह एक ऐतिहासिक मेला है जो की पुराने समय से लगता हुआ चला रहा है। ये दीपावली के दूसरे दिन अगहन मास की द्वितीया को मेला लगाया जाता है।

 

इस मेले में महिलाएं कुछ ऐसा करती है की वह आईना खरीदती है। खरीदने के पश्चात अपने आपको अपने श्रंगार को उसमें देखती हैं। उसके बाद उसको दान कर देतीे हैं। परंतु बाकी कार्यक्रम और कार्यों के ऊपर पाबंदी लगने के साथ-साथ इस मेले को लगने से भी रोक दिया गया है।
मुगलकालीन से मान्यता चली आ रही है कि महिलाएं दर्पण में अपने श्रंगार को देख करके इस दर्पण को दान कर देतीे हैं। उनका मानना है की दर्पण को दान करने से सुंदरता बरकरार रहती है। इसके साथ-साथ मुश्किलात भी दूर हो जाती हैं। हम इसे टोटका भी कह सकते है और यह
ट्रेडीशन लक्ष्मी नगरी में ही नजर आती दिखती है।

जाने हाल्ट मेला की सच्चाई।

बताया जाता है की पूर्व में कानपुर से लखनऊ आने वाले जो वाहन होते थे या फिर बैल गाड़ियां होती थी, वह बनी स्थित सई नदी के पुल के समीप रुका करती थी। इसके पश्चात इसे लोग हाल्ट स्थान के नाम से जानने लगे और यह स्थान आज भी हाल्ट के नाम से जाना जाता है
धीरे-धीरे यहां पर सुंदर द्वितीया के दिन लोग आकर के टिकने लगे और यह हटिया मेला के नाम से प्रसिद्ध हो गया यहां पर नदी के समीप शिव मंदिर स्थित है और यह मंदिर भी सैकड़ों साल पुराना ही है।

वहां के निवासी शिव शंकर ने बताया की इस मेले में मैं दादा के साथ आया करता था और वह मुझे इस मेले के बारे में बताया करते थे। इस मेले में लखनऊ शहर से ही नहीं। अन्य कई जि़लों से भी दुकानदार आते हैं और अपनी दुकान लगाते हैं। यहां पर चूड़ियों के साथ साथ श्रृंगार की दुकानें भी लगाई जाती हैं, जिसमें पुरुषों को जाने से मना कर दिया जाता है। इस मेले में महिलाएं अधिक तादाद में नज़र आती हैं।

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