लखनऊ ने मनाया सोग – कल्बे सादिक की मृत्यु के  पश्चात रविवार को मजलिस में लोगों की भीगी आंखें मौलाना ने कहा उनकी जिंदगी से मिली हमको सीख।

लखनऊ ने मनाया सोग – कल्बे सादिक की मृत्यु के  पश्चात रविवार को मजलिस में लोगों की भीगी आंखें ।

 

लखनऊ,( कुलसूम फात्मा ) सीनियर शिया धर्मगुरु मौलाना डॉक्टर कल्बे सादिक जो की ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के उपाध्यक्ष रहे और उनकी मृत्यु के पश्चात लखनऊ में एक बार फिर मजलिस क़ायम कर लोगों ने सोग मनाया। बता दे की डॉक्टर कल्बे सादिक की रूह पिछले दिनों जन्नत को परवाज़ कर गई और लखनऊ आज तक के गमगीन है।

 

इसी के सिलसिले से लखनऊ में स्थित गुफरानअमाब इमामबाड़े में मजलिस क़ायम की गई और इस मजलिस का उद्देश्य था की डॉक्टर कल्बे सादिक कि रुह को सवाबे दारेन हासिल हो। इस मजलिस को मौलाना शफी हैदर साहब ने खिताब फरमाया और मजलिस में कहा की धर्म संप्रदाय से उठकर के कल्बे सादिक साहब ने हमें एकता और इंसानियत का सबक पढ़ाया है।

उन्होंने कहा कि हमें इस चीज को अपनी जिंदगी में उतारना चाहिए जिससे उनकी रूह को सुकून मिले। कहा की उनकी रूह को सुकून पहुंचाने के लिए हम सब को उनके बताए हुए रास्ते को अपनाना चाहिए। इस मजलिस में इमामबाड़े में मौलानाओं का काफी मजमा नजर आया और इसके साथ ही उनके चाहने वाले भी वहां पर मौजूद रहे। मजलिस के पहले कुराने पाक की तिलावत कराई गई और उनकी रूह को उसका सवाब बक्शवाया गया।

मौलाना ने मजलिस के दौरान बताया की कल्बे सादिक साहब की वसीयत थी की बाद मेरे मरने के मजलिस और मेरी रूह के सवाब के लिए घर में ही, मजलिस का इंतजाम किया जाए और तिलावते कुराने पाक कराई जाए। जब यह बात मौलाना ने मजलिस के दौरान बताइए तो मजलिस में आए हुए लोगों की आंखें भीग गई।

 

बता दें की कल्बे सादिक साहब की मृत्यु 81 वर्ष की उम्र में 24 नवंबर को एरा मेडिकल कॉलेज में हुई ,उन्हें सांस की दिक्कत होने पर 17 नवंबर को वह हॉस्पिटल में एडमिट कराए गए थे। मौलाना के बेटे मौलाना कल्बे सिब्ते नूरी से जब बातचीत की तो उन्होंने बताया की उनके वालिदैन को सांस लेने में परेशानी हो रही थी जिसके कारण उनकी मृत्यु हो गई।

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