40 हजार लोग है प्रत्यारोपण के इंतेजार में प्रत्यारोपण को लेकर अब फैलाई जाएगी लोगों में जागरूकता।

40 हजार लोग है प्रत्यारोपण के इंतेजार में प्रत्यारोपण को लेकर अब फैलाई जाएगी लोगों में जागरूकता।

 

 

 

 

 

लखनऊ, ( कुलसूम फ़ात्मा )      मरीजों की संख्या देखते हुए साधनों की प्रदेश में बहुत कमी है। किडनी के खराब हो जाने के पश्चात इसका अंतिम उपाय ट्रांसप्लांट ही होता है  दानकर्ता जिनको मिल जाते हैं, वह तो किस्मत वाले अपने आप को महसूस करते हैं परंतु जिन को दानकर्ता नहीं मिल पाते हैं। आखिर उनके लिए क्या उपाय किया जाए ?

विशेष बात तो यह है कि ट्रांसप्लांट को बढ़ावा दिए बगैर किडनी की आवश्यकता पूरी नहीं होगी।
संजय गांधी पीजीआई के नेफ्रोलॉजी विभाग के प्रमुख प्रोफ़ेसर नारायण प्रसाद ने कहा
कि अगर देखा जाए तो ट्रांसप्लांट कराने के लिए तकरीबन प्रदेश में 40 हजार लोग इंतजार कर रहें है। और किडनी की आवश्यकता बिना ट्रांसप्लांट के पूर्ण नहीं हो सकती है।

उन्होंने कहा कि ट्रांसप्लांट का इंतजार यदि किया जाए तो डायलिसिस की आवश्यकता पड़ती है परंतु प्रदेश में केवल 1600 डायलिसिस स्टेशन मौजूद है।
इस तरह से प्रदेश में संसाधनों की कमी है और संसाधन बढ़ाने की बहुत आवश्यकता है।
निदेशक प्रोफेसर आरके धीमन के अनुसार सीटों के जरिए कैडवरिक ट्रांसप्लांट करने में सहायता मिलेगी और इस को बढ़ावा देने की पूरी उम्मीद जताई जा रही है।
वह कहते हैं कि कैडवरिक ट्रांसप्लांट को यदि बढ़ावा मिला तो इसके ज़रिए 26 सरकारी तथा निजी अस्पतालों को जोड़ दिया जाएगा।

 

चिकित्सा शिक्षा मंत्री सुरेश खन्ना ने बताया की – 

 

 

प्रदेश में लोगों को अंगदान करने को लेकर जागरूक करने की बहुत ही आवश्यकता है। लोगों को जागरूक कराने के लिए विशेष रूप से योजना तैयार की गई है।
क्योंकि ट्रांसप्लांट को लेकर उत्तर भारत बहुत ही पीछे हैं।
उन्होंने कहा कि अंग प्रत्यारोपण विशेष सेवा जिसके द्वारा लोगों को हम जीवन दे सकते हैं। प्रत्यारोपण को लेकर के अंगदान करने की कमी को दूर करने के लिए सीटों की विशेष रूप से सहयोग होगा।
विशेषज्ञों से वार्तालाप करने के पश्चात पता चला की अभी प्रदेश में लिवर ट्रांसप्लांट किसी अस्पताल में नहीं है। पीजीआई ने कुछ समय पूर्व प्रारंभ किया था परंतु अभी वहां भी रूका हुआ है।

 

अस्पताल के प्रशासन विभाग के प्रमुख प्रोफ़ेसर राजेश हर्षवर्धन से बातचीत के दौरान पता चला की सीटों के गठन के पश्चात प्रदेश में अंग दान संबंधित लोगों को जानकारी देकर जागरूक कराया जाएगा और

मृतक के परिवार वालों को भी इस बात से जागरूक कराया जाएगा। यदि वह मान जाएंगे तो प्रत्यारोपण का पूरा ब्यौरा लिखा जाएगा।

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