उत्तरप्रदेश सरकार ने सरकारी संपत्तियों के लिए बनाया नया कानून।

उत्तरप्रदेश लखनऊ। सरकार ने बनाई संपत्तियों के लिए  कानून। राज्य मुख्यालय।  शैलेंद्र श्रीवास्तव।
प्रदेश  सरकार नजूल के साथ शासकीय जमीनों के निस्तारण और उसके रख-रखाव यानी प्रबंधन के लिए जल्द नया कानून लाने जा रही इन पर प्रभाव पड़ेगा इस है।

उत्तर प्रदेश में ऐसी जमीनों के रख- रखाव के अभीतक कोई भी अधिनियम के दायरे में सरकार के रखाव व निस्तारण के लिए कोई किसी भी विभाग द्वारा जारी किए गए कानून नहीं है।

 

शासनादेश के सहारे पट्टे आएंगे। ये सभी इस अधिनियम कामचलाया जा रहा है। इसीलिए की शर्तों और नियमों के अधीन ‘उत्तर प्रदेश सरकारी संपत्ति प्रबंधन निस्तारित किए जाएंगे। इस एवं निस्तारण अधिनियम-2020’ अधिनियम की उपधारा (1) के लाने की तैयारी है।

उतर प्रदेश। राजस्व विभाग के  के अधीन किए गए पट्टे आएंगे। अभी फिलहाल इसका पैमाना बना कर रख लिया है और साथ ही विधि के किसी नियम,जल्द ही इसे कैबिनेट में मंजूरी के परिनियम या विधान मंडल के किसी लिए रखा जा सकता है।

अधिनियम के अनुरूप किसी भी चीज या विवादों का जल्द से जल्द होगा निपटारा प्रदेश में ग्राम समाज की जमीनों के अलग से कानून चाहती है, जिससे रख-रखाव और उसके निस्तारण अड़चनें दूर हो सकें।

संपत्ति प्रबंधन के लिए राजस्व संहिता तो है, एवं निस्तारण अधिनियम में इसी की लेकिन इसके अलावा अन्य व्यवस्था की जा रही है। शासकीय जमीनों के संबंध में कोई इसके आने के बाद प्रदेश मेंअधिनियम नहीं है।

राज्य सरकार शासकीय और नजूल की जमीनों शासकीय और नजूल की जमीनों के को लेकर चल रहे विवादों का
रख-रखावव निस्तारण के लिए समाधान हो सकेगा।

कमिटी के होते हुए भी सरकार के अधीन  नियंत्रण होगा। इसी तरह आगरा काश्तकारी के अधीन रहते हुए विभागीय नियमों अधिनियम-1926 और उत्तर प्रदेश के अनुसार प्रभावी होंगे।

जमींदारी विनाश एवं भूमि व्यवस्था येदायरे से बाहर होंगेः इस अधिनियम-1950 के साथ राजस्व अधिनियम के दायरे से उत्तर प्रदेश संहिता अधिनियम-2006 बाहर काश्तकारी अधिनियम 1939 बाहर होंगे।

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