8923669588 रॉन्ग नंबर से महिला अधिवक्ता को आया फोन फोन रिसीव होते ही रॉन्ग नंबर से सुनाई गई अश्लील बातें। क्या महिला अधिवक्ता के नंबर आज भी नहीं है सुरक्षित ?

8923669588 रॉन्ग नंबर से महिला अधिवक्ता को आया फोन , क्या महिला अधिवक्ता के नंबर आज भी नहीं है सुरक्षित ?

 

 

 

 

अब आम महिलाओं के नंबर ही नहीं अब अधिवक्ता महिलाओं के फोन नंबर भी नहीं है सुरक्षित –

वैसे तो आप आए दिन रॉन्ग नंबर के आने की बातें सुना ही करते होंगे। कभी एक सामान्य ग्रहणी को रॉन्ग नंबर की कॉल आई और अनाप शनाप उस कॉल के द्वारा बातें कही गई तो कभी जॉब करती हुई महिला को रॉन्ग नंबर से कॉल आई और उसके लिए अपशब्द प्रयोग किए गए।

 

 

महिलाओं में दिन पर दिन ज़िन्दगी में कुछ करने का जज्बा जैसे जैसे निखरता हुआ नजर आ रहा है। वही दूसरी तरफ महिलाओं को खौफ से दबाया भी जा रहा है कहीं रेप कांड तो कभी अकेली महिला गुजरी तो उसके ऊपर कमेंट बाजी इन सब बातों के कारण कुछ परिवार के लोग तो अपने घर की लड़कियों को घर से बाहर निकलने की इजाजत भी नहीं देते हैं।      वर्तमान समय में महिला चाहे अधिवक्ता हो या डॉक्टर हो या फिर कॉन्स्टेबल हो। वह आज भी सुरक्षित नहीं है रात के समय बाहर निकलने पर इनको आज भी एक बार सोचना पड़ता है। कहीं ऐसा ना हो मेरे साथ कोई वारदात हो जाए।

 

 

क्या अकेली महिला है आज भी है सुरक्षित?

 

महिलाओं की तो बात दूर है। महिलाओं के नंबर भी अब सुरक्षित नहीं है

 

महिलाओं की तो बात दूर है। महिलाओं के नंबर भी अब सुरक्षित नहीं है  जी हां  सोमवार के दिन अधिवक्ता को दोपहर के समय तकरीबन 1:15 पर नए नंबर से फोन 8923669588 से आया फोन    रिसीव होते ही अधिवक्ता से अनाप-शनाप बातों के साथ उसके लिए अपशब्द बोले गए जिसे सुनते ही महिला अधिवक्ता का दिमाग सुन हो गया और वह थोड़े समय के लिए ब्लॉक हो गई फिर तुरंत ही महिला हेल्पलाइन नंबर पर शिकायत दर्ज कराई।

 

बता दे के अधिवक्ता कुलसुम फात्मा लखनऊ सिटी की रहने वाली हैं जो कि लखनऊ में ही प्रैक्टिस कर रही हैं। इनके नंबर पर दोपहर 1:15 पर रॉन्ग नंबर से फोन आया और अपशब्द उनके लिए इस्तेमाल किए गए जिसको सुनकर के वह सुन हो गई और गुस्से में उन्होंने महिला हेल्पलाइन नंबर पर फोन किया। फोन करने के पश्चात महिला हेल्पलाइन नंबर से कहा गया की इस पर आप दोबारा फोन मत कीजिएगा। दोबारा फोन आए तो मुझे कंप्लेन कीजिएगा।

 

महिला हेल्पलाइन नंबर पर एक बार की थी और शिकायत

 

बता दें की एडवोकेट कुलसुम फात्मा ने इससे पूर्व दो माह हुए महिला हेल्पलाइन नंबर पर शिकायत इसी नंबर की दर्ज कराई थी। परंतु दोबारा फिर फोन आया 2 माह पूर्व भी यही शब्द इस्तेमाल किए गए थे और दो माह बाद भी इन्हीं शब्दों का अधिवक्ता के लिए प्रयोग किया गया।
संभव है की महिला हेल्पलाइन नंबर से इसके खिलाफ कोई भी कार्रवाई नहीं की गई।

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