LU – 100 साल पुराना लखनऊ विश्वविद्यालय नए सिरे से आय के साधन जुटाने में लगा ।

LU – 100 साल पुराना लखनऊ विश्वविद्यालय नए सिरे से आय के साधन जुटाने में लगा ।

 

 

आपको जानकर हैरानी होगी की लखनऊ विश्वविद्यालय को सरकार से सालाना बजट पर कुछ भी नहीं मिलता
लखनऊ विश्वविद्यालय अपने आय के संसाधन खुद जुटाता है। अलीम अपने संसाधनों से तकरीबन 270 करोड रुपए से अधिक निकाल लेता है। जिसमें जमा फीस होती है और अनेक लोगों की सहायता भी सम्मिलित है।

विश्वविद्यालय, यूट्यूब तथा वेबसाइट के अलावा स्लैप ऐप को भी कमर्शियल बनाने में लगा हुआ है। जिससे कि आय के नए साधन जुटाए जा सके यहां तक की तैयारी में लगा हुआ है कि पूर्व विद्यालयों की सहायता ली जाए। साथ ही विभागों का खर्च स्वयं उठाएं। विश्वविद्यालय के लिए बजट को संभालना बड़ी बात नहीं है जो कमियां होती हैं उनके पीछे सिर्फ एक ही कारण है। वह है बजट तकरीबन कुल तीन 30 करोड़ के बजट में 30 से 35 करोड़ रुपए ही ग्रांट मिल पाता है और इस वजह से विभागों की हालत ठीक नहीं है। कई जगह निर्माण संबंधित भी दिक्कतें आई हैं।

विश्व विद्यालय अध्यापक तथा कर्मचारियों का वेतन की भी जिम्मेदारी लिए हुए हैं। साथ ही ये विश्वविद्यालय के रखरखाव की भी जिम्मेदारी स्वयं ही लिए हुए हैं।कर्मचारी तथा अध्यापकों के वेतन में तकरीबन तीन करोड़ रुपए खर्च हो जाता है। इसके अलावा अनेक एजेंसियां द्बारा किए कार्य विश्वविद्यालय के लिए उसका पेमेंन्ट भी इसी बजट से किया जाता है।

विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर आलोक कुमार ने बताया की  –
विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर आलोक कुमार ने बताया की  – विश्वविद्यालय अपने संसाधन जुटाने में बहुत ही तेजी के साथ लगा हुआ है। उन्होंने बताया की उपमुख्यमंत्री डॉक्टर दिनेश शर्मा से अनुरोध किया गया है कि 25 हजार रुपए छात्र छात्राओं के लिए और साज सज्जा तथा शौचालय निर्माण के लिए दिए जाएं। साथ ही उन्होंने कहा कि हमारा यूट्यूब चैनल काफी अच्छा चल रहा है जिसका विज्ञापन भी वर्तमान समय में प्रारंभ हो गया है उन्होंने कहा कि हम पूर्व विद्यार्थियों से अनुरोध करेंगे कि वह विभाग पर होने वाले हर वर्ष के खर्च को अपने ऊपर ले ले और हम उनकी स्मृति को विभाग में जीवित रखेंगे।

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