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स्वास्थ विभाग के आंकड़ों के अनुसार 20 अगस्त तक राज्य ने पिछले साल  50 जेई मामले और चार मौतें दर्ज की

 उत्तर प्रदेश लखनऊ कोरोना वायरस के मामले में  वेक्टर जनित रोगों में बहुत बड़ी गिरावट देखी जा सकती है। 

 

 उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में जैसे ही यूपी सरकार ने कोविड-19 के खिलाफ लड़ाई लड़ी है जापानी  इंसेफलाइटिस  मलेरिया और डेंगू जैसी वेक्टर जनित बीमारियों की घटनाओं में गिरावट दर्ज की गई है। 

स्वास्थ विभाग के आंकड़ों के अनुसार 20 अगस्त तक राज्य ने पिछले साल  50 जेई मामले और चार मौतें दर्ज की जो इस साल 2 मामलों के साथ उन्हें इस मामले में गिर कर रह गई है। 

लखनऊ कोरोना
लखनऊ कोरोना

 

इसी तरह एक  इंसेफेलाइटिस सिंड्रोम आईएस के मामले पिछले साल के 816 से घटकर इस साल 396 हो गए हैं। 

 

यहां तक कि इससे होने वाली मौतों की संख्या पिछले साल से गिरकर 12 तक आई है। 

 उत्तर प्रदेश में इस वर्ष 2019 में 15101 से लेकर 4687 तक मलेरिया के मामलों में महत्वपूर्ण गिरावट दर्ज की है गिरकर 32 हो गई है। 

 

 चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव प्रसाद ने कहा कि इन लोगों की संख्या में गिरावटका मुख्य कारण राज्य में चलाए जा रहे संपूर्ण स्वच्छता अभियान के परिणाम है। 

 उन्होंने कहा राज्य वेक्टर जनित बीमारियों का मुकाबला किया गया है लोग बेहतर स्वच्छता बनाए रखें रहे और विभिन्न प्रोटोकॉल का पालन कर रहे हैं जिससे मरीज़ों की संख्या में कमी आने के कारण और पेचिस की घटनाओं में कमी आई है। 

 

स्वास्थ्य विभाग के आला अधिकारियों का कहना है कि यह एक अच्छी बात है कि इन लोगों में भारी मात्रा में गिरावट देखी गई है। 

 

अगर यह बीमारी से ग्रसित लोग भी अपनी चरम सीमा पर  रहते तो और कोरोना वायरस से जंग लड़ते लड़ते लोगों की मौतें भी बढ़ जाती जिससे राज्य सरकार में अस्थिरता का माहौल पैदा हो जाता। 

 

लेकिन राज्य सरकार के एक बेहतरीन कदम को उठाते हुए देखा गया है और स्वच्छता पर काफी गंभीरता से प्लान किया जाता है और उसका पालन भी किया जा रहा है। 

 

 जिस वजह से इन सब बीमारियों में काफी गिरावट देखी गई है अगर यही बीमारी कोरोना वायरस के साथ होती तो मौत दर  तो बढ़ती ही बढ़ती साथ ही और भी नई समस्याओं का माहौल बन जाता जिससे राज्य में और अस्थिरता का माहौल पैदा हो जाता। 

 

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