Mahatma Gandhi!

Mahatma Gandhi Story

हाय दोस्तों,

आज हम बात करेंगे महात्मा गांधी के बारे में !

एक ऐसी कहानी जो बहोत काम लोग ही जानते होंगे ! उनको एक बार South Africa में ट्रैन से गोरो ने English Man ने Train से इसलिए सिर्फ धक्का दिया था क्यू की साउथ अफ्रीका में काळा गोरो का बेध था ! ये गाँधी जी की Apartheid यानी रंग बेध से बहोत पहली और कड़वी मुलाकात थी ! दोस्तों आपको बता दू उसी वक़्त से उनका जीवन पलट गया एक और घटना है सायेद कुछ लोग जानते होंगे और कुछ लोग नहीं जानते होंगे एक बार जब वो साउथ अफ्रीका के ट्रैन में कही सफर कर रहे थे उनके साथ एक घटना घटी वो घटना यह था की पहले साउथ अफ्रीका में अंग्रज़ो का राज था जो की उस वक़्त लगभग पूरी दुनिया में उनका ही राज हुवा करता था ! उस वक़्त वंहा एक क़ानून हुवा करता था की कोई भी ट्रैन अगर स्टेशन से गुजरेगी तो रुकेगी सिर्फ अंग्रेजो के लिए एहि हुवा हामरे गांधी जी अंग्रेज तो थे नहीं इसलिए ट्रैन रुकी नहीं तो उनको स्टेशन पर गाडी धीरे धीरे गुजर रही थी ! तो उनको मजबूरन गाडी दौड़ कर पकड़ना पड़ा तो हुवा ये की गाडी दौड़ के पकड़ने के चक्कर में एक जूता उनका फिसल गया और एक जूता उनके पैर में ही रह गया तो उन्होंने फ़ौरन वो जूता भी उतारकर फेंक दिए तो उनके साथ खड़ा एक वयक्ति बड़े कौतहुल से उनके तरफ देखते हुवे बोले तुमने अपना दूसरा जूता भी क्यू फेंक दिया तो उन्होंने बड़े प्यार से उस सज्जन को जवाब दिया यह एक जूता तो मेरे अब किसी काम का नहीं इसलिए मेने फेंक दिया ! अगर यह जूता जिसको भी मिलेगए तो एक जोड़ी मिलेंगे येह जूता उनके पहनने के काम आजएंगे इसलिए मेने ऐसा किया ! यह समय अंग्रेजो ने अत्याचार तो बिलकुल किया था ट्रैन सिर्फ गोर अंग्रेजो के लिए ही रूकती थी अगर अंग्रेजो को नहीं चढ़ना होता तो ट्रैन उस स्टेशन पर धीरे हो जाती और आपको दौड़ कर ट्रैन पकड़ना पड़ता छाए वह कोई भी क्यू न जैसे बड़ा हो या पेट से औरत बच्चा कोई भी ! यह वह वक़्त था जब गाँधी जी महात्मा बनने के और अग्रसर थे दोस्तों साउथ अफ्रीका में जो भी उनके साथ हुवा था वो बिलकुल सही नहीं था लेकिन गांधी को येह सब झकझोर कर रख दिया था उन्होंने इन सब चीजों का सामना किया और बेहद ही प्यार से और निस्वार्थ होकर अगर उस जगह कोई और होता तो सायेद वो यह नहीं कर सकता था ! दोस्तों यह कभी हम नहीं सोचते की दुसरो की मदद कैसे करे या उनकी तकलीफ कैसे काम करे आज हर कोई सिर्फ अपने लिए सोचता है सिर्फ अपने लिए कोई किसी से मतलब नहीं रखना चाहता है अगर कोई मतलब रखता भी है तो सिर्फ अपने फायदे के लिए सोचो दोस्तों अगर गाँधी जी ने भी अगर ऐसा किया होता तो सायेद उनको कोई नहीं जनता और ये बापू की उपदि भी उनको नहीं मिलती दोस्तों अमेरिका में एक सर्वे हुवा था ! जो की 1992 के टाइम के सबसे बड़ी कम्पनी में हुवा था वो सर्वे यह था की कुछ कम्पनी महज कुछ सालो में इतनी बड़ी होगी थी की कई छोटे छोटे देशो की जीडीपी से व् ज्यादा उनकी टर्न ओवर था ! जब वह सर्वे हुवा तो एक कॉमन चीज सामने निकल कर आया की जितनी भी बड़ी से बड़ी कंपनी थी उन्होंने लोगो की प्रॉब्लम सॉल्व किया है तो दोस्तों यही सेम चिज्ये कर के हम अपने जीवन में भी भोत बड़े बन सकते है दुसरो की प्रॉब्लम को सॉल्व करके उनकी लाइफ में नई रोशनी लाके !

दोस्तों में इसतरह की ही नोलजेबल कंटेंट आपके लिए लेकर आता रहूँगा जिससे aapki मदद हो सके! तो दोस्तों जाते जाते यही बोलूंगा अपने करीबी और प्रियजनों के साथ शेयर करे! जय हिन्द !

Mahatma Gandhi

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