B.Ed की 2.15 लाख सीटों पर अब होगी 19 नवंबर से काउंसलिंग ।

B.Ed करने वाले छात्रों के लिए खुशखबरी लखनऊ विश्वविद्यालय ने B.Ed करने वाले छात्रों के लिए कार्यक्रम तैयार कर दिया गया है।और इसके प्रवेश के लिए काउंसलिंग 19 नवंबर से प्रारंभ कर दी जाएगी

तथा 10 दिसंबर से नए सत्र की शुरुआत प्रारंभ हो जाएगी। B.Ed के राज्य प्रवेश समन्वयक प्रो• अमित बाजपेई से वार्तालाप करने के पश्चात यह ज्ञान हुआ कि
पहले चरण में 19 नवंबर से 19 दिसंबर तक यह काउंसलिंग की जाएगी।


और अंतिम चरण में 26 से 30 दिसंबर तक एडमिशन होंगे।
इसके पश्चात 12 से 19 दिसंबर तक पूल काउंसलिंग होगी।, इस सत्र का प्रारंभ 10 दिसंबर से होगा। इस तरह से 90% सीटें भरने की पूरी उम्मीद जताई जा रही है।और आगरा कानपुर मेरठ राज्य के विश्वविद्यालयों के रिजल्ट
वर्तमान समय में भी नहीं आए हैं।और एडमिशन के लिए काउंसिलिंग 19 अक्टूबर से निश्चित की गई थी ।

आंकड़ों के मुताबिक B.Ed की तकरीबन 12.15 लाख सीटें हैं परन्तु उपर्युक्त विश्वविद्यालय के अंतिम वर्ष का रिजल्ट ना आने के कारण इसे टाल दिया गया है। उनसे बातचीत करने के पश्चात पता चला कि 1.20 स्टूडेंट्स के रिजल्ट अभी भी फंसे हैं साथ ही यह भी बताया की काउंसलिंग अब नहीं टाली जाएगी और यदि परीक्षा का परिणाम नहीं आया तो विश्वविद्यालय अब स्वयं जिम्मेदार होगा इस निर्णय से बीएड छात्रों को सहायता मिलेगी।

उत्तर प्रदेश में अक्टूबर से दिसंबर के बीच पड़ रहे त्योहारों की जाने गाइडलाइन

लखनऊ – कोरोना महामारी के दौरान उत्तर प्रदेश में अक्टूबर से दिसंबर के बीच आ रहे त्योहारों के सीजन में जाने कैसे मनाए जाएंगे त्यौहार तथा क्या होगी गाइडलाइन। आपको बता दें कि रामलीला तथा दशहरा जैसे त्योहारों के लिए सामूहिक गतिविधियां यदि किसी बंद स्थान या हाल, कमरे में होती हैं तो उसकी निर्धारित क्षमता कम से कम 50% तथा 200 व्यक्ति अधिकतम वह भी फेस मास्क और शारीरिक दूरी, थर्मल स्क्रीनिंग, सेनिटाइजेशन और हैंड वॉश कर के शामिल हो सकेंगे अन्यथा नहीं।

सरकार ने आ रहे त्यौहार को मनाने की जहां अनुमति दी है वहीं दूसरी ओर गाइडलाइन को फॉलो करने का भी यकीन जताया है। गाइडलाइन के अंतर्गत सरकार ने यह भी बताया कि त्यौहार की गतिविधियां यदि खुले स्थान या फिर मैदान में होती हैं तो उसके क्षेत्रफल के हिसाब से कोरोना महामारी से बचाव के लिए प्रोटोकॉल का पालन करना आवश्यक होगा।

कोरोना महामारी से बचाव और नियंत्रण के लिए शुक्रवार को यूपी के मुख्य सचिव राजेंद्र कुमार तिवारी ने तथा केंद्रीय स्वास्थ्य परिवार कल्याण मंत्रालय ने दिशा-निर्देश देते हुए गाइडलाइन जारी की।

गाइडलाइन के अंतर्गत वह लोग होंगे कौन और गाइडलाइन में क्या होगी सख़्ती

गाइडलाइन के अंतर्गत आने वाले व्यक्ति

  1. 65 वर्ष से ज्यादा उम्र के व्यक्ति 
  2. गंभीर रोगों से जूझ रहे लोग 
  3. गर्भवती महिलाएं 
  4. 10 वर्ष से कम उम्र के बच्चों  को घर पर रहने की सलाह दी गई है 
  5. साथ ही आयोजक और प्रबंधक के कर्मीकों के लिए भी यह गाइडलाइन पूर्ण रूप से लागू होगी।
  6. आइसोलेट करने के लिए प्रत्येक आयोजन स्थल पर एक आइसोलेशन कक्ष की भी व्यवस्था की जाएगी 
  7. 6 फीट की शारीरिक दूरी बनाए रखने के लिए थर्मल स्कैनिंग तथा सैनिटाइजेशन में  सुविधा हो, इसलिए कार्यक्रम स्थल पर अल्कोहल युक्त सैनिटाइजर थर्मल स्कैनिंग उपकरणों की पर्याप्त आपूर्ति होगी तथा शारीरिक दूरी बनाए रखने के लिए फर्श पर गोले भी बनाए जाएंगे ताकि प्रवेश द्वार पर ही हैंडसैनिटाइज और स्कैनिंग की जा सके।
  8. कार्यक्रम स्थल पर प्रवेश के लिए तथा विकास के लिए अलग-अलग जितने हो सकेंगे रास्ते होंगे जिससे कि शारीरिक दूरी बनी रहे।
  9. सार्वजनिक स्थानों पर थूकने की सख़्ती होगी
  10. धार्मिक आयोजन के लिए नोएडा व लखनऊ में पुलिस कमिश्नर और, अन्य जिलों में डीएम की पहले अनुमति लेना अनिवार्य होगी।

गाइडलाइन में इनका भी रखना होगा ख्याल

  • सभी को आरोग्य सेतु एप का प्रयोग करने की सलाह दी गई है।
  • स्वच्छ पेयजल की व्यवस्था के साथ-साथ गिलास डिस्पोजल कप को सही तथा उचित स्थान पर फेंका जाए जिससे की सफाई बनी रहे।
  • दरवाजों के हैंडल बटन, लिफ्ट के बैरिकेङ्क्षडग, सीट, बेंच, वॉशरूम के हैंडल तथा टोटी आदि की सफाई  विसंक्रमित की जाएगी। 
  • सामूहिक खानपान और लंगर में शारीरिक दूरी को बनाए रखना होगा।
  • गाइड लाइन में सबसे आवश्यक महत्वपूर्ण बात यह होगी कि एयर कंडीशनर का टेंपरेचर 24 से 30 डिग्री सेल्सियस और यूनिटी रेंज 40 से 70% के बीच रखनी होगी।
  • स्थलों पर शारीरिक दूरी तथा मास्क पहनने के नियमों की निगरानी के लिए जगह-जगह सीसीटीवी कैमरे भी लगाए जाएंगे।
  • यदि हम आयोजकों की बात करें तो उनको पर्याप्त मैनपावर तैनात करना होगा तथा स्टाफ के लिए फेस कवर, मास्क, हैंड, सैनिटाइजर, साबुन, सोडियम, हाइपोक्लोराइट आदि की भी व्यवस्था पूर्ण रूप से करनी पड़ेगी।
  • लोगों में जागरूकता पैदा करने के लिए कार्यक्रम स्थल पर कोरोना महामारी से बचाव के लिए उपाय से संबंधित पोस्टर तथा बैनर लगाए जाएंगे जिससे कि लोग जागरूक हो सके और यथासंभव जितना हो सके स्पर्श रहित रहे और कार्यक्रम स्थलों पर क्या किया जाए और क्या नहीं उस बैनर के अंतर्गत सारे दिशा निर्देश होंगे। जिले में हर आयोजन स्थल पर सार्वजनिक रूप से प्रचार प्रसार के लिए पब्लिक ऐड्रेस सिस्टम का इस्तेमाल भी अधिक से अधिक किया जाएगा।
  • मूर्तियों की स्थापना पारंपरिक तो की जाएगी परंतु खाली स्थान पर होगी जिसका आकार छोटा होगा और चौराहों तथा सड़क पर कोई मूर्ति या ताजिया नहीं रखा जाएगा। मूर्तियों के विसर्जन में यथासंभव छोटे वाहन इस्तेमाल किए जाएंगे और इसमें कम से कम लोग ही शामिल होंगे 
  • जो व्यक्ति उपर्युक्त गाइडलाइन को फॉलो नहीं करेंगे उनके लिए भुगतान करने की भी व्यवस्था की जाएगी।

जाने त्योहारों के संबंध में

  1. 17 अक्टूबर, शारदीय नवरात्र 
  2. 23 अक्टूबर, महाअष्टमी 
  3. 24 अक्टूबर ,महानवमी 
  4. 25 अक्टूबर ,विजय दशमी अर्थात दशहरा
  5. 30 अक्टूबर, 12 वफात 
  6. 31 अक्टूबर वाल्मीकि जयंती 
  7. 12 नवंबर, धनतेरस 
  8. 13 नवंबर, छोटी दीपावली
  9. 14 नवंबर, दीपावली 
  10. 15 नवंबर , गोवधर्न पूजा 
  11. 16 नवंबर ,भैया दूज 
  12. 20 नवंबर छठ पूजा।

बाराबंकी मार्ग पर दाल से भरा लूटा गया ट्रक, आधुनिक तकनीक बदमाशों पर पड़ी भारी

बाराबंकी –  आज बाराबंकी मार्ग से जा रहे एक मटर की दाल से भरे ट्रक को बदमाशों द्वारा लूट लिया गया, जिसकी कीमत तकरीबन साढ़े 5 लाख रुपये है। लूटे हुए ट्रक के चालक ने जैसे ही  पुलिस को इस विषय में सूचित किया तो आधुनिक तकनीकों की मदद से  पुलिसकर्मियों को यह पता चला कि  डीसीएम में जीपीएस सिस्टम लगा हुआ है। फिर क्या था पुलिस फौरन के फौरन लोकेशन निकालकर लूटी हुई ट्रक के समीप पहुंची।  मिली जानकारी के अनुसार चोरी की गई ट्रक पुलिस वालों को सफदरगंज में दिखाई दी।

पुलिस ने सोमवार की सुबह छापेमारी की परन्तु बदमाश तब तक भाग निकलने में पूरी तरह से सफल हो गए थे। मौके पर पहुंचते ही पुलिसे द्बारा लदे दाल के ट्रक को बरामद कर लिया गया। 

बदमाशों ने की मारपीट

मिली जानकारी अनुसार ट्रक चालक शिवम पुत्र कुंदन जालोना जनपद में स्थित कामाख्या एंटरप्राइजेज से 220 बोरी मटर की दाल जिसकी कीमत अंदाज़न करीब साढ़े ₹5,00000 है को लेकर भगवतीपुर थाना औरैया से निकला था उसे उसके निश्चित स्थान जो कि अयोध्या जनपद के रुदौली कस्बे में स्थित गोयल ट्रेडिंग कंपनी है,  पर पहुंचाने हेतु। 

जब चालक नेशनल हाईवे पर शहर कोतवाली क्षेत्र के करौली गांव समीप पहुंचा तो शौच करने के लिए अपने ट्रक को हाईवे के किनारे लगा दिया। जब वह शौच करके लौटा तो अचानक से उसने देखा कि बाइक से दो  बदमाश उतरे और डीसीएम के अंदर उसे डालकर पीटना शुरू कर दिए। उसके बाद ट्रक चालक को नीचे धक्का देकर दाल भरी डीसीएम लूट कर ले गए। उस समय उस चालक के पास ₹17000 नगद जो कि उसकी जेब में थे तथा उसका मोबाइल और ट्रक में लगी एलसीडी भी लूट कर ले गए।

जब बदमाश उस घटनास्थल से चले गए तो बेसुध चालक शिवम ने राहगीरों से मदद मांगी। मोबाइल मांग कर 112 नंबर पर फोन किया तो मौके पर पीआरवी के जवान पहुंचे और चालक को कोतवाली पहुंचाया। कोतवाली पुलिस ने जब चालक के बताए गए नंबर जो की गाड़ी मालिक का था, संपर्क किया तो उन्होंने बताया कि डीसीएम में जीपीएस सिस्टम लगा है।

फिर क्या था पुलिस ने लोकेशन के द्वारा ट्रक को खोज निकाला जो कि  पुलिस वालों को सफदरगंज बदोसराय मार्ग पर मिला। मिली जानकारी के अनुसार पुलिस ने जब चिलौकी गांव के आसपास छापा मारा तो ट्रक वहीं पर मिला और वहां पर एक गोदाम था, जिसमें एक चौकीदार भी था। उस गोदाम के अंदर तलाशी लेने के पश्चात लूटा गया सारा माल  भी बरामद कर लिया गया। 

चौकीदार से की गई पूछताछ

पुलिस ने गोदाम पर बैठे चौकीदार को फौरन हिरासत में ले लिया। चौकीदार रोहन ने बताया कि गोदाम के मालिक चौखंडी निवासी अब्दुल गफ्फार पुत्र मोहम्मद यूसुफ है। परंतु गोदाम को सफदरगंज कस्बे के रहने वाले मोहम्मद रफी पुत्र मोहम्मद असगर ने किराए पर ले रखा है। वह उनके लिए ही यहीं पर रहकर चौकीदारी का काम कर रहा है। पुलिस ने गोदाम को किराए पर लेने वालों की तलाश में छापेमारी की मगर वह घर पर नहीं मिले। उपर्युक्त मामले की जांच पुलिस द्वारा बड़े ही जोर शोर से की जा रही है। माना जा रहा है कि पुलिस जल्द से जल्द उन बदमाशों को भी ढूंढ निकालेगी।

आखिर जीपीएस सिस्टम है क्या ?

जीपीएस सिस्टम द्वारा किसी भी वाहन के लोकेशन को अर्थात वह उस समय कहां है खोज निकाला जा सकता है। यह लूटपाट जैसी वारदात के होने पर सहायता प्रदान करता है।

उत्तर प्रदेश में 19 अक्टूबर से खुलने जा रहे हैं कक्षा 9 से 12 के विद्यार्थियों के लिए विद्यालय

जैसा कि हम सभी जान रहे हैं कि बीते 7 महीनों से देशभर के सभी शिक्षा संस्थान बंद रखे गए थे मौजूदा समय के बढ़ते कोरोना महामारी संक्रमण को रोकने हेतु। हालांकि अब जब कोरोना से संक्रमित होने वाले मरीजों की संख्या घटती जा रही है तो देशभर में अनलॉक 5.0 के तहत सभी बंद सेवाओं को धीरे धीरे खोला जा रहा है।

इसी दरमियान जितने भी शिक्षा संस्थान हैं उन्हें भी खोलने को लेकर अलग अलग राज्य में बैठकें की जा रही है। मिली जानकारी के अनुसार आगामी 19 अक्टूबर से उत्तर प्रदेश के सभी विद्यालयों को कक्षा 9 से 12 तक के विद्यार्थियों के लिए खोला जा रहा है। हालांकि इस दौरान विद्यालयों में मौजूद सभी शिक्षकों एवं विद्यार्थियों को कुछ नियमों का पालन करना होगा।

यूपी अनएडेड स्कूलस असोसिएशन के अध्यक्ष अनिल अग्रवाल द्वारा साझा की गई जानकारी के अनुसार मौजूदा परिस्थिति में जब स्कूलों को खोला जा रहा है तो ऐसे में छात्रों के बैठने की व्यवस्था ठीक उसी प्रकार की जाएगी जैसे परीक्षा के दौरान कक्षाओं में की जाती है। जिसका मतलब यह है कि जिस प्रकार परीक्षा के दौरान कक्षा में मौजूद सभी बेंचों पर छात्र एवं छात्राओं के नाम तथा उनके क्रमांक लिखे जाते थे ठीक उसी प्रकार अब भी सभी बेंचों पर छात्रों के नाम एवं क्रमांक लिखे जाएंगे जिसके अनुसार सभी छात्रों को कक्षा में बैठना होगा। 

 कैसे संचालित की जाएगी विद्यालय

  • मिली जानकारी के अनुसार आपको बता दें 19 अक्टूबर से खुलने जा रहे सभी स्कूलों को दो पालियों में बांटा जाएगा जिसकी समय सीमा  प्रातः 8:00 से 11:00 तथा दोपहर में 12:00 से 3:00 निर्धारित किया गया है।
  • सभी छात्रों को मास्क पहनकर विद्यालय में प्रवेश करने दिया जाएगा। बिना मास्क पहने छात्रों के प्रवेश पर वर्जित लगा दिया गया है।
  •  स्कूलों में प्रवेश हेतु दो द्वार खुले रखे जाएंगे।
  • प्रवेश करने के दौरान सभी छात्रों की थर्मल स्क्रीनिंग की जाएगी।
  •  सोशल डिस्टेंसिंग के नियमों का पालन करवाने हेतु 50 मीटर के दायरे पर गोल सर्कल बनाए जाएंगे जिसमें छात्रों को खड़ा होना होगा। ऐसा करके स्कूल प्रबंधन की ओर से सभी छात्रों के बीच सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करवाया जाएगा।
  •  दोनों पालियों में आने वाले  अलग-अलग विद्यार्थियों की रिकॉर्ड तैयार की जाएगी जिसके तहत यह सुनिश्चित किया जाएगा कि कौन सा विद्यार्थी किस पाली में विद्यालय में उपस्थित रहा है।
  • इन सबके अलावा जो बात सबसे मुख्य रूप से सभी विद्यार्थियों को माननी होगी वह यह कि सभी छात्र एवं छात्राओं को अपनी-अपनी पुस्तक एवं अन्य सामग्री का इस्तेमाल करना होगा। किसी भी विद्यार्थी को किसी दूसरे विद्यार्थी के पुस्तक या पेंसिल या कलम इस्तेमाल करने की इजाजत नहीं दी जाएगी।

इन सबके अलावा सभी स्कूलों में सैनिटाइजेशन टनल भी बनाने का प्रावधान किया जा रहा है।

हालांकि एडेड स्कूलों की ओर से इन सारी व्यवस्थाओं को लेकर आपत्ति जताई जा रही है। उनका कहना है कि स्कूल प्रबंधन के पास इतना बजट नहीं हैं जिसकी मदद से  यह सारी व्यवस्था जिसमें सैनिटाइजेशन भी शामिल है सुनिश्चित की जा सके। 

मिली जानकारी के अनुसार आपको बता दें कि आगामी 19 अक्टूबर को सभी विद्यालयों के खुलने से पहले 17 एवं 18 अक्टूबर को सभी विद्यालयों की जांच की जाएगी यह सुनिश्चित करने के लिए कि  प्रशासन द्वारा सभी दिए गए दिशा-निर्देशों का सही तरीके से पालन किया जा रहा है या नहीं। जांच पूर्ण रूप से संपन्न होने के बाद ही विद्यालयों को खोलने दिया जाएगा।

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कोरोना काल में रोजगार देने का लिया निर्णय, शिक्षकों के रिक्त पदों पर होगी अब भर्ती

सोमवार को उत्तर प्रदेश के परिषदीय प्राथमिक विद्यालयों में 31661 अभ्यर्थियों की रिक्त पदों की लिस्ट जारी की गई तथा बेसिक शिक्षा परिषद के सचिव प्रताप सिंह बघेल की ओर से यह सूची जारी की गई और बताया गया कि भर्ती की यह प्रक्रिया जल्द से जल्द पूरी होगी।

आपको बता दें भर्ती की प्रक्रिया को लेकर पहले भी सुप्रीम कोर्ट में विवाद जा चुका है ऐसे में मुख्यमंत्री के आदेश पर विभाग ने जो लिस्ट जारी की है उस पर अभी तक कोई निर्णय नहीं लिया गया है। ऐसी परिस्थिति में वापस से किसी तरह का विवाद होने की आशंका जताई जा रही है। 

मिली जानकारी के अनुसार सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट ने अभ्यार्थियों को मिले पूर्णांक में संशोधन के भी आदेश दिए हैं। परन्तु बेसिक शिक्षा विभाग की ओर से अबतक कोई कार्यवाही नहीं की गई है। 

आइए जाने कोर्ट में मामला चलने का कारण –

अर्चना चौहान ने इंटरमीडिएट पूर्णांक के कॉलम में 500 की जगह 5000 लिख दिया था। सुप्रीम कोर्ट ने 2 सितंबर को फार्म में संशोधन के आदेश भी दिए थे। इसके पश्चात हाई कोर्ट में भी लक्ष्मी देवी समेत 13 अन्य लोगों के मामले में संशोधन के आदेश दिए थे। परंतु बेसिक शिक्षा विभाग की ओर से संशोधन पर अब तक कोई अमल नहीं किया गया।

मौके पर अर्चना चौहान के भाई हिमांशु का कहना है कि बिना संशोधन किए लिस्ट जारी करना, सुप्रीम कोर्ट के आदेश की अवहेलना करने जैसा है।  ऐसे में अवमानना का केस करने के अलावा कोई और ऑप्शन नहीं बचेगा।

उद्यान विभाग द्वारा लिया गया निर्णय, इस वित्तीय वर्ष ड्रिप व स्प्रिंकलर से सिंचाई का लक्ष्य किया जाएगा पूरा

मिली जानकारी के अनुसार मौजूदा वित्तीय वर्ष में उद्यान विभाग द्वारा 1,58,000 हेक्टेयर में ड्रिप व स्प्रिंकलर कि मदद से  सिंचाई करने का लक्ष्य रखा गया है।  इस विषय पर उद्यान विभाग द्वारा साझा की गई जानकारी के अनुसार सिंचाई की इस विधि को  बढ़ावा देने हेतु लघु एवं सीमान्त किसानों को इकाई लागत के तहत 90 प्रतिशत और अन्य किसानों को 80 प्रतिशत अनुदान मुहैया कराने की व्यवस्था की गई है।

वही सरकारी प्रवक्ता द्वारा जारी किए गए एक बयान के अनुसार ‘पर ड्राप मोर क्राप’ मुहीम के साथ साथ बुन्देलखण्ड विशेष पैकेज का भी क्रियान्वयन कराया जा रहा है जिसके अंतर्गत लगभग 74612 हेक्टेयर में ड्रिप एवं स्प्रिंकलर सिंचाई की सुविधा का लाभ अबतक 51,465 किसानों को मिल चुका है। 

उद्यान विभाग द्वारा जारी की गई जानकारी के अनुसार अबतक एकीकृत बागवानी मिशन, राष्ट्रीय कृषि विकास योजना और पर ड्राप मोर क्राप माइक्रोइरीगेशन जैसे अन्य कई योजनाओं का प्रचार-प्रसार प्रभावी रूप से किया जा रहा है।

आपको बता दें कि उद्यान विभाग की ओर से ड्रिप एवं स्प्रिंकलर के माध्यम से सिंचाई कार्य को प्रभावी रूप से करने हेतु कुल 248.88 करोड़ रुपये का प्राविधान किया गया है।

आगामी विधानसभा उपचुनाव में कोरोना संक्रमित बुजुर्ग या दिव्यांग मरीजों के घर या अस्पताल से पोस्टल बैलट कराए जाएंगे संकलित

मिली जानकारी के अनुसार उत्तर प्रदेश में इस बार 7 खाली विधानसभा सीटों पर होने जा रहे विधानसभा उपचुनाव के मद्देनजर एक अहम फैसला लिया गया है। स्वास्थ्य सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए जितने भी कोरोना से संक्रमित बुजुर्ग या दिव्यांग होंगे उनके लिए एक अलग सुविधा प्रदान की गई है ताकि विधानसभा सीटों के लिए होने वाले उपचुनाव में वह भी अपना बहुमूल्य वोट अपनी पसंदीदा प्रतिनिधि को दे सके। इसमें जो सबसे रोचक बात निकल कर सामने आई है वह यह की इस कार्य को करने हेतु अब इन मरीजों को पोलिंग बूथ तक भी नहीं जाना होगा, बल्कि इनके घर या अस्पताल से ही पोस्टल बैलट संकलित करवाए जाएंगे।

कैसे संचालित होगी पूरी प्रक्रिया

प्रशासन द्वारा जारी की जाए इस तरीके के तहत अब चुनाव मशीनरी से जुड़े कर्मिकों  को इन मरीजों के पास पीपीई किट पहनकर जाना होगा और प्रत्येक वोटरों के पोस्टल बैलट संकलित करने होंगे।

सामान्य पोलिंग बूथों पर कैसे संचालित होगी वोटिंग की प्रक्रिया

अब तक हमने देखा कि किस प्रकार प्रशासन की ओर से संक्रमित मरीजों द्वारा उनके बहुमूल्य वोट,  होने वाले विधानसभा उपचुनाव के लिए संकलित किए जाएंगे। वही बात जब सामान्य यानी उन वोटरों की करें जो कोरोना संक्रमित नहीं है तो उनके लिए भी खास प्रावधान किए गए हैं ताकि उनके स्वास्थ्य संबंधी विषयों का खास ध्यान रखा जा सके।

बुधवार को यानी आज उत्तर प्रदेश के मुख्य निर्वाचन अधिकारी अजय कुमार शुक्ल द्वारा इन सातों विधानसभा सीटों से संबंधित जिलों के डीएम व एसएसपी / एसपी से वीडियो कान्फ्रेंसिंग पे हुई बातचीत के दौरान कई अहम फैसले लिए गए। मुख्य निर्वाचन अधिकारी द्वारा किए जा रहे वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से बैठक के दौरान अपर मुख्य निर्वाचन अधिकारी डा. योगेश्वर राम मिश्र और संयुक्त मुख्य निर्वाचन अधिकारी रमेश चन्द्र राय भी मौजूद थे। 

आपको बता दें शुक्रवार यानी 9 अक्तूबर से आगामी विधानसभा उपचुनाव हेतु नामांकन की प्रक्रिया शुरू होने जा रही है जिसकी चल रहे तैयारियों की समीक्षा अधिकारियों द्वारा की गई। गौरतलब है कि नामांकन की प्रक्रिया हेतु चल रही तैयारियों की समीक्षा करने के अलावा चुनाव प्रचार और फिर मतदान आदि के लिए पर्यवेक्षकों, पुलिस-प्रशासन के अधिकारियों, कर्मचारियों की तैनाती के लिए वाहन, हैण्ड सैनिटाइजर, ग्लब्स, पीपीई किट आदि के इंतजामों के बारे में भी इस बैठक के दौरान चर्चा की गई।

मिली जानकारी के अनुसार आपको बता दें होने वाले विधानसभा उपचुनाव को लेकर प्रत्येक पोलिंग बूथ पर जो भी वोटर मतदान करने आएंगे उन्हें इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन का बटन दबाने से पहले सैनिटाइज्ड ग्लब्स दिए जाएंगे। इन सबके अलावा पोलिंग बूथ पर आए मतदाताओं के बीच सोशल डिस्टेंसिंग के अलावा  बाकी के जरूरी दिशा निर्देशों का सही तरीके से पालन हो सके इसके लिए उपयुक्त चुनाव कर्मिकों को भी तैनात किया जाएगा।

‘स्वामित्व योजना’ के अंतर्गत ग्रामीणों को बांटा जाएगा घरौनी प्रमाण पत्र

स्वामित्व योजना के तहत 11 अक्टूबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा डिजिटल रूप से एक वर्चुअल कार्यक्रम के तहत ग्रामीणों को घरौनी प्रमाण पत्र बांटा जाएगा।

इस कार्यक्रम के तहत डिजिटल रूप में प्रॉपर्टी रिकॉर्ड केवल चुनिंदा लाभार्थियों को ही प्रधानमंत्री द्वारा बांटा जाएगा।

आपको बता दें स्वामित्व योजना के तहत केंद्र सरकार मौजूदा समय में उत्तरप्रदेश में आबादी का रिकॉर्ड यानी घरौनी तैयार कर रही है। इस प्रॉपर्टी के रिकॉर्ड को एक कार्ड के रूप में सभी लाभार्थियों को उपलब्ध कराया जाएगा।

राजस्व परिषद की भूमि व्यवस्था आयुक्त भीष्म लाल वर्मा ने बयान जारी कर जानकारी साझा की जिसके अनुसार यह बताया गया कि प्रदेश के चुनिंदा जिलों के डीएम को 11 अक्टूबर को प्रधानमंत्री द्वारा किए जा रहे कार्यक्रम को लेकर सही तरह से सारी व्यवस्था करने के अलावा 24 घंटे के अंदर अपने-अपने जिलों में कोरोना महामारी को लेकर सोशल डिस्टेंसिंग के अलावा अन्य सावधानियों को ध्यान में रखते हुए जनप्रतिनिधियों की मौजूदगी में इस योजना से जुड़े सभी लाभार्थियों को प्रॉपर्टी कार्ड का वितरण सुनिश्चित करने का निर्देश जारी किया गया है।

जिले जहां इस कार्यक्रम का किया जाएगा आयोजन

 

  • गोरखपुर
  • वाराणसी 
  • फतेहपुर
  • गोंडा
  • गाजीपुर
  • देवरिया
  • चंदौली
  • चित्रकूट
  • बहराइच
  • बस्ती
  • बाराबंकी
  • बांदा
  • बलरामपुर
  • बलिया
  • आजमगढ़
  • अयोध्या
  • अमेठी
  • अंबेडकर नगर
  • मऊ
  • हमीरपुर
  • जालौन
  • जौनपुर
  • झांसी 
  • कौशांबी
  • कुशीनगर
  • ललितपुर
  • महाराजगंज
  • महोबा
  • मिर्जापुर
  • प्रतापगढ़
  • प्रयागराज
  • भदोही
  • संतकबीर नगर
  • श्रावस्ती
  • सिद्धार्थ नगर
  • सोनभद्र 
  • सुल्तानपुर

बहुत जल्द भारत संचार निगम लिमिटेड देने जा रहा है उपभोक्ताओं को सुनहरा तोहफा, अक्टूबर के अंत तक बढ़ जाएगी इंटरनेट सेवा की स्पीड

बहुत जल्द भारत संचार निगम लिमिटेड के उपभोक्ता इंटरनेट स्पीड के कम होने की शिकायत से निजात पा लेंगे। भारत संचार निगम लिमिटेड के द्वारा साझा की गई जानकारी के अनुसार कंपनी ने इंटरनेट की स्पीड को बढ़ाने का निर्णय लिया है और अपने फैसले पर कंपनी की ओर से काम भी शुरू कर दिया जा चुका है।

आपको बता दें इंटरनेट की स्पीड बढ़ाने हेतु कंपनी की ओर से सीपैन उपकरण लगाने का निर्णय लिया गया है। बीएसएनएल द्वारा लिए गए इस फैसले के तहत गोरखपुर व महाराजगंज जनपदों में भी सीपैन उपकरण लगाने का कार्य शुरू कर दिया जा चुका है। बीएसएनल के उप महाप्रबंधक आर एन यादव ने जानकारी साझा करते हुए बताया कि जितने भी टेलिफोन एक्सचेंज है  उन सभी में सीपैन लगाने का कार्य काफी तेजी के साथ आगे बढ़ रहा है। आपको बता दें कि एक्सचेंज की क्षमता के अनुसार ही उनमें यह उपकरण लगाए जा रहे हैं।

गौरतलब है कि लगातार उपभोक्ताओं की ओर से इंटरनेट सेवा की धीमी स्पीड को लेकर आ रही शिकायत के मद्देनजर बीएसएनएल कंपनी ने इस समस्या से उपभोक्ताओं को निजात दिलाने हेतु यह फैसला किया है।  

उन शहरों की सूची जहां उपकरण लगाने का कार्य प्रगति पर है

  • गोरखनाथ
  • चौरीचौरा
  • पिपराइच
  • घूघली 
  • कैंपियरगंज 
  • पीपीगंज 
  • आनंद नगर 
  • नौतनवां 
  • महाराजगंज

 

इन क्षेत्रों में उपकरण लग जाने के बाद इंटरनेट की स्पीड में 5 से 10 गुना तक की वृद्धि देखने को मिल सकती है। आपको बता दें अब तक एफटीटीएस ग्राहकों को बीएसएनएल के ब्रॉडबैंड की स्पीड केवल 10 से 15 एमबीपीएस मिल रही थी, मगर सीपैन लगने के बाद यह स्पीड 10 से 15 एमबीपीएस से बढ़कर 40 से 50 एमबीपीएस हो जाएगी। वहीं कुछ ऐसे शहर भी है जहां पर यह उपकरण लगा दिया गया है, जैसे नंदानगर, दिव्यनगर तथा सिविल लाइंस, इन क्षेत्रों में यह उपकरण लगने के बाद यहां के उपभोक्ताओं द्वारा इंटरनेट की स्पीड में वृद्धि अनुभव की गई हैं।

मिली जानकारी के अनुसार अक्टूबर के अंत तक यह काम पूरा कर दिया जाएगा  जिसके बाद उपभोक्ता मानक के अनुरूप तीव्र गति की इंटरनेट सेवा अनुभव कर सकेंगे।

पद्मश्री किसान रामसरन वर्मा के केला खेती की तकनीक पर आधारित प्रदेश में बनेगा टिश्यू कल्चर केला पौध तैयार करने के लिए लैब

उत्तर प्रदेश के पद्मश्री पुरस्कार से नावाजित किसान रामसरन  वर्मा द्वारा अपनाई गई केला खेती करने की तकनीक को काफी ज्यादा सहराया जा रहा है। उनके इस तकनीक को अपनाते हुए प्रदेश में अब टिशु कल्चर केला पौध तैयार करने हेतु लैब बनवाने की घोषणा की गई है। आपको बता दें बीते सोमवार को नगर के ओवरी में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने इस लैब के बनवाए जाने की घोषणा की। इसके अलावा उन्होंने किसान रामसरन वर्मा द्वारा अपनाई गई केला खेती तकनीक के विषय में चर्चा भी की।

इस कार्यक्रम के दौरान कृषि मंत्री ने इस बात का भी उल्लेख किया की जहां एक ओर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ-साथ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार उत्तर प्रदेश के किसानों की आय दुगनी करने के प्रयास में जुटी हुई है तो वहीं दूसरी ओर पद्मश्री पुरस्कार से नवाजित रामसरन वर्मा टिशू कल्चर के मदद से केले की खेती के जरिए आय को 4 से 5 गुना तक बढ़ाने में जुटे हुए हैं।

मिली जानकारी के अनुसार टिशू कल्चर केला के पौधे आंध्र प्रदेश के हैदराबाद के साथ-साथ गुजरात के लैब में तैयार किए जाते हैं और वहां से इन पौधों को उत्तर प्रदेश मंगवाया जाता है। हालांकि अब उत्तर प्रदेश में इस लैब के बन जाने से यहां के किसानों को बाहर जाने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी। इतना ही नहीं इससे बाहर से जो टिशु कल्चर केला के पौधे मंगवाए जाते थे उसमें होने वाले खर्च भी बचेगा और परिणाम स्वरूप किसान इससे ज्यादा से ज्यादा फायदा उठा सकेंगे।

कृषि मंत्री से पहले अपर निदेशक कृषि आनंद त्रिपाठी ने भी रामसरन वर्मा द्वारा अपनाए गए तकनीक जिससे केले की खेती के साथ-साथ टमाटर की खेती करके किसान अपनी आए कई गुना तक बढ़ा सकते हैं को लेकर उनकी काफी प्रशंसा की थी एवं उन्हें किसानों का रोल मॉडल भी घोषित किया था।

आपको बता दें बाराबंकी जिले के दौलतपुर गाँव के रहने वाले किसान रामसरन वर्मा को रोजगार सृजन को लेकर उनके द्वारा किए जा रहे प्रयासों के मद्देनजर उन्हें पद्मश्री पुरस्कार से नवाजा गया था।  

कृषि मंत्री के द्वारा की गई घोषणा जिसके तहत प्रदेश में अब टिशु कल्चर केला पौधा तैयार करने के लिए लैब बनवाया जाएगा को लेकर रामसरन वर्मा ने बयान जारी कर कहा है कि उत्तर प्रदेश में केला उत्पादन के लिए जैसी जलवायु की आवश्यकता है वैसी ही है और अब जब टिशु कल्चर केला की लैब यहां पर बनाई जाएगी तो इससे प्रदेश में होने वाले केले की खेती में एक तरह से क्रांति देखने को मिलेगी। जिससे किसानों की आय में वृद्धि के साथ-साथ और भी कई तरह के फायदे देखने को मिलेंगे।